Ranchi : झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) के अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के शोधार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी शोध क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया है.
पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के गलसी महाविद्यालय में आयोजित सातवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सीयूजे के दो शोधार्थियों को उनके उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
यह सातवां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 6 और 7 मार्च 2026 को गलसी महाविद्यालय के राजनीतिक विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित किया गया था. सम्मेलन का आयोजन इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (ICWA), सप्रू हाउस, नई दिल्ली तथा कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ इंडो-पेसिफिक स्टडीज (KIIPS) के सहयोग से किया गया. सम्मेलन का विषय विभाजित दुनिया में भारतीय मॉडल: संघवाद, बहुलवाद और लोकतांत्रिक लचीलापन रखा गया था, जिसमें भारत के संघीय ढांचे, लोकतांत्रिक परंपराओं और विविधता के बीच सह-अस्तित्व जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई.
सम्मेलन में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से आए शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया. इस दौरान समसामयिक और शोधपरक विषयों पर लगभग 70 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिन पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार-विमर्श किया.
झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग से प्रो. डॉ. विभूति भूषण विश्वास के नेतृत्व में शोधार्थियों का एक प्रतिनिधिमंडल सम्मेलन में शामिल हुआ. इस प्रतिनिधिमंडल के दो शोधार्थियों ने अपने उत्कृष्ट शोध कार्य से निर्णायकों को प्रभावित करते हुए सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार प्राप्त किया.
विभाग की शोधार्थी पूजा कुमारी को उनके शोध पत्र एक राष्ट्र, एक चुनाव: विकसित भारत 2047 तथा संघवाद पर इसका प्रभाव के लिए सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया. अपने शोध में उन्होंने वन नेशन, वन इलेक्शन की अवधारणा का भारतीय संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर संभावित प्रभावों का विश्लेषण प्रस्तुत किया.
वहीं विभाग के शोधार्थी निशांत मोहन को उनके शोध पत्र निर्वाचन पैराशूटिंग: बिहार के लोकसभा चुनावों (2004–2024) में गैर-स्थानीय उम्मीदवारों का विश्लेषण के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया. उनके शोध में बिहार के लोकसभा चुनावों में बाहरी उम्मीदवारों की भागीदारी और उसके राजनीतिक प्रभावों का विस्तृत अध्ययन किया गया है.
इस सम्मेलन में देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने भाग लेते हुए समसामयिक वैश्विक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा किए. इस उपलब्धि पर झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने दोनों शोधार्थियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
यह उपलब्धि न केवल दोनों शोधार्थियों के लिए बल्कि झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए भी गौरव का विषय मानी जा रही है, जिससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और शोध गतिविधियों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है.
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