Ranchi : भगवान बिरसा मुंडा के गांव उलिहातू से विभिन्न आदिवासी प्रतिनिधियों द्वारा उलगुलान पदयात्रा निकाली गई. जो शनिवार को कोकर स्थित भगवान बिरसा मुंडा समाधि स्थल पहुंची, जहां सभी आदिवासी प्रतिनिधियों ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर फूल-माला अर्पित किए और उनके संघर्ष को याद किया.
इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता अजय टोप्पो, निरंजना हेरेंज टोप्पो, आशुतोष सिंह चेरो, अधिवक्ता राकेश बड़ाईक और राजेश लिंडा समेत अन्य मौजूद रहे. इस दौरान आदिवासी प्रतिनिधियों ने आदिवासी समाज से अपने अधिकारों के लिए जागने की अपील की. उन्होंने कहा कि आदिवासियों को अपने संवैधानिक अधिकार, जल-जंगल-जमीन और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को बचाने के लिए एकजुट होना होगा.
सरकार की गलत नीतियों के कारण आदिवासी समाज अपनी जमीन से विस्थापित होने के कगार पर है. वहीं, बड़ी संख्या में बेरोजगार युवक-युवतियां रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं. ये झारखंड के आदिवासी-मूलवासी समाज के लिए गंभीर मुद्दे हैं.
पदयात्रा के प्रतिनिधियों ने कहा कि पिछले 25 वर्षों से झारखंडी समाज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है. जिन सपनों के साथ वीर शहीदों और पूर्वजों ने अलग झारखंड की लड़ाई लड़ी थी, उन सपनों के साथ न्याय नहीं हुआ है. अपने पूर्वजों के सपनों और सम्मान को बचाने के लिए ही वे सड़क पर उतरे हैं.
सरकार के सामने रखीं 10 सूत्री मांगें
उलगुलान पदयात्रा के माध्यम से सरकार से झारखंडी हित में कई मांगें रखी गई हैं. इनमें प्रमुख रूप से खतियान आधारित स्थानीय नीति लागू करने,100 प्रतिशत झारखंडियों के लिए नियोजन नीति बनाने और राज्य की नौकरियों में आदिवासी-मूलवासी युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग शामिल है.
इसके अलावा पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में पेसा नियमों को सख्ती से लागू करने, सीएनटी-एसपीटी कानून के उल्लंघन पर जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई करने और आदिवासी जमीन से जुड़े मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की मांग की गई है.
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