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झारखंड में शुरू होगी ‘वाल्मीकि छात्रवृत्ति योजना’, अनाथ व दिव्यांग छात्रों की ट्यूशन फीस देगी सरकार

झारखंड सरकार ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे अनाथ और दिव्यांग छात्रों के लिए बड़ी पहल करते हुए ‘वाल्मीकि छात्रवृत्ति योजना’ शुरू करने का निर्णय लिया है.
 

Ranchi : झारखंड सरकार ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे अनाथ और दिव्यांग छात्रों के लिए बड़ी पहल करते हुए ‘वाल्मीकि छात्रवृत्ति योजना’ शुरू करने का निर्णय लिया है. यह योजना शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी और इसके तहत छात्रों की ट्यूशन फीस सरकार द्वारा वहन की जाएगी. योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 मई 2026 से शुरू होगी.

 

यह योजना मुख्य रूप से उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की है, जिसमें समाज कल्याण एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ कल्याण विभाग भी सहयोग करेगा.

 

10 लाख रुपये तक ट्यूशन फीस का लाभ

योजना के तहत सरकार एक छात्र की ट्यूशन फीस के रूप में प्रति वर्ष अधिकतम 10 लाख रुपये तक वहन करेगी. इससे अधिक खर्च होने पर अतिरिक्त राशि छात्र को स्वयं देनी होगी. वहीं हॉस्टल, भोजन और अन्य खर्च छात्रों को खुद उठाने होंगे.

 

कौन होंगे पात्र

अनाथ छात्र: जिनके माता-पिता का निधन 18 वर्ष की आयु से पहले हो चुका है. इसके लिए प्रमाणित दस्तावेज जरूरी होंगे.दिव्यांग छात्र: दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत कम से कम 40% दिव्यांगता (बेंचमार्क) और यूडीआईडी कार्ड अनिवार्य होगा.

 

लाभार्थियों की संख्या पर कोई सीमा नहीं

सरकार ने योजना के तहत लाभार्थियों की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की है. जो भी छात्र निर्धारित शर्तों को पूरा करेंगे, उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा. अनुमान के अनुसार राज्य में करीब 45 हजार दिव्यांग छात्र हैं, हालांकि उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों का सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.

 

स्थानीयता और शैक्षणिक योग्यता

लाभ लेने के लिए छात्र का झारखंड का स्थानीय निवासी होना या राज्य के मान्यता प्राप्त संस्थान से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी करना जरूरी है. हर साल नवीनीकरण के लिए पिछली परीक्षा की मार्कशीट और अगली कक्षा में प्रवेश का प्रमाण पत्र अपलोड करना होगा.

 

किन संस्थानों के छात्रों को मिलेगा लाभ?

झारखंड के मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र पात्र होंगे.राज्य के बाहर पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए संस्थान का देश की ओवरऑल रैंकिंग में टॉप 200 में होना जरूरी है.इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ, प्रबंधन और फार्मेसी जैसे कोर्स के लिए संस्थान का टॉप 100 में होना अनिवार्य है.

 

 


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