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14 साल बाद फिर शुरू होगी विश्रामपुर ग्रेफाइट माइंस, 4 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार

वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के लागू होने के बाद वन भूमि की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण यहां कई वर्षों से खनन कार्य बंद है. वर्ष 2012 के बाद इस माइंस में व्यावसायिक खनन नहीं हो सका. अब वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया पूरी कर इसे फिर से चालू करने की तैयारी की जा रही है.
 
  • पहले चरण में  25 हेक्टेयर क्षेत्र में होगा खनन
  • लीज विस्तार के लिए सरकार को भेजा गया प्रस्ताव

Ranchi/Palamu :  पलामू जिले के विश्रामपुर स्थित वर्षों से बंद पड़ी ग्रेफाइट माइंस को एक बार फिर चालू करने की तैयारी शुरू हो गई है. झारखंड स्टेट मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (JSMDC) और खान विभाग ने इसके लिए विस्तृत योजना तैयार कर ली है. माइंस शुरू होने पर करीब 4,000 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है.

 

जानकारी के अनुसार, यह ग्रेफाइट खनन पट्टा वर्ष 1976 में तत्कालीन बिहार स्टेट मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (BSMDC) को आवंटित किया गया था. वर्तमान में इसकी लीज वर्ष 2026 तक वैध है. लीज के विस्तार और नवीनीकरण के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जा चुका है.

 

2012 के बाद से बंद है खनन

वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के लागू होने के बाद वन भूमि की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण यहां कई वर्षों से खनन कार्य बंद है. वर्ष 2012 के बाद इस माइंस में व्यावसायिक खनन नहीं हो सका. अब वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया पूरी कर इसे फिर से चालू करने की तैयारी की जा रही है.

 

पहले चरण में 25 हेक्टेयर में होगा खनन

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पूरे 223.44 हेक्टेयर लीज क्षेत्र में से पहले चरण में केवल 25 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन शुरू करने की योजना बनाई गई है. इसमें मुख्य रूप से ब्लॉक-1 और ब्लॉक-3 को शामिल किया गया है.

 

पूरे 223.44 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रेफाइट का भंडार मौजूद है.  हालांकि, इसमें लगभग 167 हेक्टेयर वन भूमि और करीब 30 हेक्टेयर रैयती भूमि शामिल है. भूमि अधिग्रहण और वन विभाग से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने के कारण फिलहाल केवल 25 हेक्टेयर क्षेत्र में ही खनन कार्य शुरू किया जाएगा. 

 

2.73 लाख टन ग्रेफाइट का अनुमानित भंडार

भू-वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार, चयनित क्षेत्र में लगभग 0.2731 मिलियन टन (करीब 2.73 लाख टन) ग्रेफाइट भंडार होने का अनुमान है. प्रस्तावित माइनिंग प्लान के अनुसार, प्रतिवर्ष लगभग 30,484 टन ग्रेफाइट का उत्पादन किया जा सकेगा, जिससे करीब सात वर्षों तक खनन संभव होगा. 

 
लागत में होगी बड़ी बचत

मिली जानकारी के अनुसार, यदि पूरे 167.48 हेक्टेयर वन क्षेत्र में खनन की स्वीकृति ली जाती है तो वन स्वीकृति, NPV, क्षतिपूरक वनीकरण, भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रक्रियाओं पर लगभग 39.78 करोड़ रुपये खर्च होंगे.

 

वर्तमान में 25 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन शुरू करने की योजना है, जिससे यह लागत घटकर करीब 1.48 करोड़ रुपये रह जाएगी. इससे परियोजना तेजी से शुरू हो सकेगी. पलामू जिला के लिए इस महत्पूर्ण परियोजन को खान निदेशक के स्तर पर परियोजना को दोबारा शुरू करने की पहल की गई है.

 

 

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