Ranchi News: झारखंड में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा, आदिवासी महिलाओं पर कथित पुलिसिया दमन, नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटनाओं को लेकर अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन ने नाराजगी जताई है. बुधवार को महेंद्र सिंह भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन ने पुलिस प्रशासन पर महिला सुरक्षा में विफल रहने का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए नंदिता भट्टाचार्य ने कहा कि 5 अक्टूबर को लातेहार के बरियातू थाना प्रभारी प्रभात कुमार दास और कांस्टेबल मनीष राम पर एक आदिवासी महिला के साथ जातिसूचक गाली-गलौज, अश्लील व्यवहार, उल्टा लटकाकर पिटाई करने और 80 हजार रुपये वसूलने के आरोप लगे थे. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है.
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उन्होंने दुमका में 9 अक्टूबर को आठवीं कक्षा की नाबालिग आदिवासी छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि घटना के तीन दिन बाद भी पुलिस की जांच पर सवाल बने हुए हैं. उनके अनुसार, करीब 500 लोगों से पूछताछ के बाद एक व्यक्ति को पकड़े जाने की जानकारी मिली थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि पुलिस असली अपराधियों तक पहुंच पाई है या नहीं.
नंदिता भट्टाचार्य ने कोडरमा के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार यादव पर नाबालिग आदिवासी बच्ची के यौन शोषण के आरोपों का भी मामला उठाया. उन्होंने कहा कि आरोप सामने आने के 48 घंटे बाद भी सिविल सर्जन को पद से निलंबित नहीं किया जाना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार पर दबाव डालकर बच्ची को मेडिकल जांच कराने से इनकार करने के लिए मजबूर किया गया.
प्रेस वार्ता में कोडरमा की एक नर्स भी मौजूद थीं, जिन्हें संगठन ने इस मामले का गवाह बताया. नर्स के अनुसार, वर्ष 2025 में सिविल सर्जन उन पर दबाव बना रहे थे कि जिस कमरे में वह रहती थीं, उसी कमरे में नाबालिग बच्ची को भी रखा जाए. नर्स ने आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य सिविल सर्जन के लिए उस कमरे में आना-जाना आसान बनाना था. उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में शामिल होने से इनकार करने के बाद उनकी नौकरी चली गई. ये आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
झारखंड जन अधिकार महासभा की ओर से मौजूद अपूर्वा ने कहा कि राज्य की जनता ने ऐसी सरकार चुनने के लिए जनादेश नहीं दिया था, जहां महिलाओं को हिंसा और दमन का सामना करना पड़े. उन्होंने मांग की कि पुलिसकर्मियों और प्रभावशाली पदों पर बैठे आरोपियों के खिलाफ भी सामान्य अपराधियों की तरह निष्पक्ष तरीके से आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं और संविधान के अनुसार कार्रवाई हो.
संगठन ने पुलिस प्रशासन से अपना रवैया सुधारने, महिला सुरक्षा को गंभीरता से लेने और पूरे राज्य में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की. प्रेस वार्ता में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन की गीत तिर्की, झारखंड जन अधिकार महासभा की अपूर्वा और कोडरमा की एक नर्स मौजूद थीं.
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