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एक जज के रूप में हमें खुद को ट्रेनिंग देने की जरूरत : सीजेआई चंद्रचूड़

 
New Delhi : चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि एक जज के रूप में हमें खुद को ट्रेनिंग देने की जरूरत है. हम सोशल मीडिया के दौर में काम कर रहे हैं. हम जो एक-एक शब्द कहते हैं, वह सबकुछ जनता के सामने सार्वजनिक तौर पर पहुंचता है. ओड़िशा हाईकोर्ट द्वारा डिजिटलीकरण, पेपरलेस कोर्ट और ई-पहल पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि लाइवस्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया के युग में अदालत में न्यायाधीशों द्वारा कहा गया हर शब्द सार्वजनिक है, जो न्यायाधीशों के सामने नई चुनौतियां और मांगें रखता है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जरूरत

सीजेआई ने कोर्ट के वायरल वीडियोस को लेकर कहा, आजकल हाईकोर्ट सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग कर रहे हैं. इसमें कुछ समस्याएं हैं, आपने देखा होगा कि पटना हाईकोर्ट में एक जज आईएएस अधिकारी को लताड़ लगा रहे हैं कि उन्होंने शर्ट और पैंट ही पहनी है, सूट क्यों नहीं? या फिर आपने गुजरात हाईकोर्ट का वीडियो देखा होगा जिसमें पूछा जाता है कि वकील अपने केस को लेकर तैयार क्यों नहीं रहते हैं? कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं, जिसमें जज वकील को डांट रहे होते हैं या फिर वकील जज को समझाते हैं. इसको लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जरूरत है. कहा कि आप ऐसे कैसे उम्मीद करते हैं कि एक जज 15000 पन्नों वाले पूरे सबूत को पढ़ या समझ सकता है. इस मामले में जज की मदद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कर सकता है और एक रिकॉर्ड भी तैयार कर सकता है.

कानूनी शब्दावली को लेकर कही बड़ी बात

चीफ जस्टिस ने कहा कि हाल ही में उन्होंने LGBTQ हैंडबुक लांच की है. साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट उस योजना पर काम कर रहा है, ताकि कोर्ट के अंदर ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल हो, जिससे किसी को किसी शब्द को लेकर बुरा ना लगे. किसी को यह न लगे कि उसका उपहास उड़ाया गया है.
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