Lucknow : उत्तर प्रदेश स्थित मैनपुरी जिले के एक खेत से चार हजार साल पुराने तांबे के हथियार मिले हैं. इस खबर ने पुरातत्वविदों की उत्सुकता बढ़ा दी है. सबसे बड़ी बात यह कि इन हथियारों को भगवान श्रीकृष्ण काल (द्वापर युग) का बताया जा रहा है. तांबे के इन हथियारों की जांच के बाद जो शोध परिणाम आये हैं, उससे आर्कियोलॉजिस्ट काफी रोमांचित हैं. आर्कियोलॉजिस्ट इस बात से अचंभित हैं कि प्राचीन काल में भी भारतीय योद्धाओं के पास उन्नत किस्म के हथियार थे. योद्धा बड़े हथियारों से लड़ाई के मैदान में उतरते थे. वे बड़ी तलवारें रखते थे. चार फीट तक लंबे हथियार तेज और सोफिस्टिकेटेड आकार के होते थे. इसे भी पढ़ें : महाराष्ट्र">https://lagatar.in/political-crisis-continues-in-maharashtra-sanjay-raut-is-ready-to-fight-on-the-road-to-save-the-government-after-meet-sharad-pawar-the-tone-has-changed/">महाराष्ट्र
में राजनीतिक संकट जारी, सरकार बचाने संजय राउत सड़क पर भी लड़ने को तैयार, शरद पवार से मिले, तो सुर बदल गये
मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह की मौजूदगी में एनडीए की राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू ने नामांकन भरा
में राजनीतिक संकट जारी, सरकार बचाने संजय राउत सड़क पर भी लड़ने को तैयार, शरद पवार से मिले, तो सुर बदल गये
स्टारफिश के आकार के हथियारों का प्रयोग भी किया जाता था
स्टारफिश के आकार के हथियारों का प्रयोग भी किया जाता था. आर्कियोलॉजिस्टों ने हथियारों की जांच के बाद इसे रोमांचक करार दिया है. खबरों के अनुसार जून माह की शुरुआत में मैनपुरी के गणेशपुर गांव में एक किसान अपने दो बीघा खेत की जुताई करा रहा था. कई स्थानों पर खेत ऊबड़-खाबड़ होने के कारण उसे समतल कराया जा रहा था. इसी दौरान खेत से तांबे की तलवारें और हार्पून मिले. किसान यह सोच कर कि हथियार सोने या चांदी से बने हैं, हथियारों को अपने घर ले गया. लेकिन खेत से हथियार मिलने की चर्चा पूरे इलाके में फैल गयी. स्थानीय पुलिस को भी सूचना मिल गयी और बात भारतीय पुरातत्व विभाग तक जा पहुंचीहथियार ताम्र पाषाण काल (कॉपर एज) के बताये जा रहे हैं
खेत से मिले हथियारों की जांच के बाद कुछ पुरातत्वविदों ने इसे एंटीना तलवारों और हार्पून की उपाधि दी है. हथियारों के नीचे हुक लगे हुए थे. विशेषज्ञों का कहना है कि खेत के नीचे से संयोग से 4000 पुराने तांबे के हथियार मिले हैं. हथियारों के इस संग्रह के गहन अध्ययन से यह द्वापर युग के लगते है. एएसआई के आर्कियोलॉजी के निदेशक भुवन विक्रम ने दावा किया है कि तांबे के ये हथियार ताम्र पाषाण काल (कॉपर एज) के बताये जा रहे हैं. गेरूए रंग के बर्तनों (ओपीसी) के कारण यह काफी हद तक साबित होता है. बताया कि कांसा हड़प्पा काल की एक बड़ी विशेषता थी. इसे मूल रूप से तांबे के युग की एक शहरी सभ्यता के रूप में भी जाना जाता है. हालांकि, अध्ययनों से पता चला है कि इस प्रकार के हथियार मुख्य रूप से तांबे से बने होते थे. इनमें कांसे का प्रयोग नहीं होता था. इसे भी पढ़ें : पीएम">https://lagatar.in/nda-presidential-candidate-draupadi-murmu-files-nomination-in-presence-of-pm-modi-rajnath-singh-amit-shah/">पीएममोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह की मौजूदगी में एनडीए की राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू ने नामांकन भरा
Leave a Comment