में रांची पुलिस, शहर में चिपकाया उपद्रवियों का पोस्टर, देखें उपद्रव में शामिल ये चेहरे कहीं आपके बीच तो नहीं!
कभी टाल में अनंत सिंह का डंका बजता था
एक दौर था, जब टाल क्षेत्र में अनंत सिंह के नाम का डंका बजा करता था. उनकी मर्जी के बगैर टाल क्षेत्र में एक पत्ता भी नहीं खड़कता था. लंबे समय तक अनंत सिंह की हुकूमत चलती रही इसी क्षेत्र में. उन्हें छोटे सरकार के नाम से बुलाया जाता था. अनंत सिंह तो कोई बोलता ही नहीं था. अनंत सिंह को चुनौती दी ललन सिंह ने. ललन सिंह अभी मुंगेर के सांसद हैं. मुंगेर से सांसदी के लिए अनंत सिंह ने अपनी पत्नी को भी चुनाव लड़वाया था, लेकिन वह चुनाव हार गईं. उस पर अनंत सिंह ने खूब बवाल काटा था. धांधली का भी आरोप लगाया था. लेकिन कुछ हुआ नहीं. पटना में जहां पहले अनंत सिंह रहते थे, वहां रोज 10 से 12 हजार लोगों का भोजन बना करता था. ये भोजन हर किसी के लिए था. आप आइए, भोजन कीजिए और अपने घर चले जाइए. कोई आपसे नहीं पूछता था कि आप कहां से आए हैं, किस जाति के हैं, किस धर्म के हैं. भूख लगी है तो खाना खाइए और घर चले जाइए. कोई पैसा नहीं देना है. हां, आना पड़ेगा आपको टाइम पर...10 से 12 के बीच में. क्या रिक्शा वाला, क्या कूड़ा बीनने वाला...हर कोई वहां जाकर भोजन करता था.रॉबिनहुड वाली छवि भी बनाई
अनंत सिंह ने रॉबिनहुड वाली छवि बनाई भी और नहीं भी. कभी वह काउकैप पहन कर घोड़े पर बैठ कर टाल क्षेत्र में निकल जाया करते थे, कभी पटना में. उनके चेले-चपाटे तो उन्हें छोटे सरकार के नाम से बुलाते ही थे, उनकी पत्नी भी उन्हें छोटे सरकार नाम से ही संबोधित करती थी. अनंत सिंह के ऊपर कई आपराधिक कृत्य दर्ज हैं पर वह खुद को पाक-साफ बताते रहे हैं. अनंत सिंह उन विधायकों में शामिल रहे, जो बार-बार पार्टियां बदलते रहे. उनकी अपनी कोई विचारधारा कभी नहीं रही. वह कभी लालू के साथ रहे. किसी बात पर उनसे मनमुटाव हुआ तो क्या लालू, क्या राबड़ी, क्या तेजस्वी, क्या तेजप्रताप...हर किसी को न्यौत (गरिया) दिये. फिर नीतीश कुमार के पाले में चले गए. जब तक निबाह हुआ, तब तक सब सही था. जब नहीं निभी तो नीतीश कुमार को भी न्यौत दिया. ऐसा ही उन्होंने कांग्रेस के साथ भी किया. लोकसभा चुनाव में एक संवाददाता ने अनंत सिंह से पूछा कि आप दिल्ली क्यों जाना चाहते हैं. अनंत सिंह ने तपाक से जवाब दिया-हवाई जहाज पे बैठे ला...औउर का करेंगे. सब कहते हैं कि एमपी बनने पर हवाई जहाज में बैठे के मौका मिलता है तो हम बोले कि हमहूं बैठेंगे. एहे से त हम एमपी के चुनाव लड़ रहे हैं. अनंत सिंह बात-बात पर गाली देने, तड़ाक से हाथ चला देने के लिए बदनाम रहे हैं. उनके साथ दो दर्जन बाडीगार्ड रहते हैं जो उनके अपने ही होते हैं. अनंत सिंह निरक्षर हैं और यह उनकी बातचीत में झलकता भी है. आने वाले दिनों में अनंत सिंह की जिंदगी कष्टदायक होगी, इसमें कोई शक नहीं. 21 जून को पता चल जाएगा कि अनंत सिंह को क्या सजा दी गई है. मोकामा का, खास कर टाल क्षेत्र का इलाका इन दिनों गहमागहमी का केंद्र बना हुआ है. देखते हैं, 21 को उन्हें क्या सजा मिलती है. इसे भी पढ़ें – BREAKING">https://lagatar.in/breaking-eci-gave-last-chance-to-cm-hemant-said-reply-to-28-hearing-has-been-postponed-twice/">BREAKING: ECI ने CM हेमंत को दिया अंतिम मौका, कहा – 28 को दें जवाब, दो बार टाली जा चुकी है सुनवाई [wpse_comments_template]

Leave a Comment