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चुनाव आयोग का मंतव्य अच्छा हो या बुरा, स्थिति स्पष्ट करें राज्यपाल : झामुमो

Ranchi : झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने शुक्रवार को कहा कि झारखंड में पिछले कई दिनों से चल रही संशय की स्थिति को लेकर राज्यपाल रमेश बैस को केंद्रीय निर्वाचन आयोग के भेजे मंतव्य को स्पष्ट करना चाहिए. हमारे पास 81 में से 51 विधायकों का समर्थन है, फिर भी राज्य में भ्रम की स्थिति बनी है. चुनाव आयोग का मंतव्य अच्छा हो या बुरा, राज्यपाल को चाहिए कि लोगों के समक्ष इसे स्पष्ट करें.

एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं

पार्टी नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर कहा, पिछले दिनों ही झामुमो, कांग्रेस और राजद का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिल कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी. राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल से कहा था कि अधिकतम दो दिनों का समय दीजिए. वे चुनाव आयोग से अपनी बातों को अवगत करा देंगे. वहीं, राजभवन की तरफ से जारी प्रेस बयान में भी स्थिति जल्द से जल्द स्पष्ट करने की बात की गयी थी. दूसरे दिन राज्यपाल दिल्ली चले गए. सभी को लगा कि राज्यपाल इसी मुद्दे के लिए दिल्ली गए हैं. छह दिन दिल्ली में रहने और शुक्रवार को एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी ये बातें स्पष्ट नहीं हो पायी हैं.

हमें 51 विधायकों का समर्थन, यह हम शुरू से कहते रहे हैं 

झामुमो नेता ने कहा, हेमंत सोरेन सरकार पर कथित तौर पर जो गंभीर आरोप लगाया गया है, उससे राज्य में एक संशय का माहौल बन गया था. उसी माहौल को खत्म करने के लिए सरकार ने सदन में अपना बहुमत साबित किया. तीन विधायकों की अनुपस्थिति के बावजूद हेमंत सरकार को विधानसभा में 48 विधायकों का समर्थन मिला. झामुमो शुरू से कहता रहा है कि हमें 51 विधायकों का समर्थन है. इसे भी पढ़ें– झारखंड">https://lagatar.in/jharkhand-housing-board-sent-notice-to-277-people-instructions-to-remove-bank-showroom-in-15-days/">झारखंड

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भाजपा को बताना चाहिए, डेमोग्राफी इकोनॉमी को बदलने की पीछे की सोच क्या है 

राज्य के डेमोग्राफी बदलने के भाजपा सांसद निशिकांत दूबे के आरोप पर भी झामुमो ने सवाल उठाया. सुप्रियो ने कहा कि डेमोग्राफी बदलने का काम आखिर किसने किया. पिछले आठ सालों से डोमेस्टिक इकोनॉमी ही बदल दिया गया है. आज इकोनॉमी दो-चार घरानों के हाथों में चली गयी है. स्टेशन और एयरपोर्ट बेचने के बाद अब रेलवे की जमीन बेचनी की तैयारी हो चुकी है. भाजपा को बताना चाहिए कि डेमोग्राफी इकोनॉमी को बदलने की पीछे की सोच क्या है.

भाजपा के विषैल मानसिकता के विरूद्ध राज्यपाल स्थिति को स्पष्ट कर दें

झामुमो नेता ने कहा, डेमोग्राफी की बात करने वाले भाजपा नेता आखिर सरना धर्म कोड की बात क्यों नहीं करते. क्या आदिवासियों की अपनी पहचान नहीं होनी चाहिए. झामुमो मांग करता है कि भाजपा के विषैल मानसिकता के विरूद्ध राज्यपाल स्थिति को स्पष्ट कर दें, तो हम इससे लोकतांत्रिक तरीके से निपट लेंगे. इसे भी पढ़ें– लक्ष्मीकांत">https://lagatar.in/laxmikant-bajpai-becomes-in-charge-of-jharkhand-bjp-asha-lakra-is-co-in-charge-of-west-bengal/">लक्ष्मीकांत

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