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कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो? जिसने 15 अगस्त को पूछा- क्या यही आजादी है?

Ranchi News: झारखंड में सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहे JPSC-JSSC आंदोलन में एक नाम लगातार चर्चा में है - देवेंद्र नाथ महतो. कभी छात्र नेता के तौर पर सड़कों पर दिखने वाले महतो अब जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं. भूख हड़ताल, पुलिस की कार्रवाई और लगातार विरोध के बीच उनकी आवाज ने झारखंड के छात्र आंदोलन को एक अलग पहचान दी है.
 
देवेंद्र नाथ महतो की फाइल फोटो

Ranchi News: झारखंड में सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहे JPSC-JSSC आंदोलन में एक नाम लगातार चर्चा में है - देवेंद्र नाथ महतो. कभी छात्र नेता के तौर पर सड़कों पर दिखने वाले महतो अब जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं. भूख हड़ताल, पुलिस की कार्रवाई और लगातार विरोध के बीच उनकी आवाज ने झारखंड के छात्र आंदोलन को एक अलग पहचान दी है.

 

15 अगस्त को फिर चर्चा में आए महतो

स्वतंत्रता दिवस के दिन रांची में JPSC-JSSC आंदोलन कर रहे छात्रों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक तिरंगा यात्रा निकाली. महतो भी इस यात्रा में शामिल होना चाहते थे, लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने उन्हें यात्रा में शामिल होने से रोक दिया. इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया - क्या यही आजादी है?

 

महतो ने अपने सवाल में भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, खुदीराम बोस, महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के संघर्ष को याद करते हुए पूछा कि जिस आजादी के लिए इन नेताओं ने लड़ाई लड़ी, क्या उसमें अपनी बात रखने की आजादी भी नहीं है. इस घटना के बाद वह एक बार फिर आंदोलन और आजादी के अधिकार के सवाल को लेकर चर्चा में आ गए. 

 

कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?

देवेंद्र नाथ महतो झारखंड के छात्र आंदोलन से लंबे समय से जुड़े रहे हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव के समय दाखिल उनके चुनावी हलफनामे में उनकी उम्र 33 साल और पेशा छात्र तथा खेती बताया गया था. उसी हलफनामे के अनुसार उन्होंने DSPMU University, Ranchi से 2018-2020 के बीच पोस्ट ग्रेजुएशन किया था. 

 

2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सिल्ली सीट से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा. चुनाव परिणाम में उन्हें 28,362 वोट मिले और वह चुनाव नहीं जीत सके. 

 

लोकसभा चुनाव में भी उतरे थे

छात्र आंदोलन से राजनीति तक का उनका सफर भी दिलचस्प रहा है. 2024 में उन्होंने रांची लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा. उन्हें 1,32,647 वोट यानी 9.16 फीसदी वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे. भाजपा के संजय सेठ चुनाव जीते, जबकि कांग्रेस की यशस्विनी सहाय दूसरे स्थान पर रहीं. 

 

चुनावी हलफनामे में क्या दर्ज है?

चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार, महतो ने खुद को छात्र बताया था. उनके 2024 लोकसभा हलफनामे में 11 लंबित आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई थी. इनमें कई मामले प्रदर्शन और पुलिस से जुड़े धाराओं वाले हैं. उपलब्ध रिकॉर्ड में किसी मामले में सजा होने की जानकारी नहीं है. यह जानकारी चुनावी हलफनामे पर आधारित है, इसलिए इसे आरोप या लंबित मामले के रूप में ही देखा जाना चाहिए, दोषसिद्धि के रूप में नहीं. 

 

JSSC से टकराव पुराना है

देवेंद्र नाथ महतो का नाम JSSC से जुड़े छात्र आंदोलनों में पहले भी सामने आ चुका है. दिसंबर 2024 में JSSC कार्यालय के पास भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर प्रदर्शन हुआ था. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया और महतो को भी हिरासत में लिया गया था. उस समय उन्हें झारखंड स्टेट स्टूडेंट्स यूनियन के नेता के तौर पर बताया गया था. 

 

यानी 2026 का आंदोलन उनके लिए अचानक शुरू हुई लड़ाई नहीं है. भर्ती परीक्षा, पेपर लीक, पारदर्शिता और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों पर वह पहले भी आंदोलन करते रहे हैं.

 

2026 में JPSC-JSSC आंदोलन का चेहरा

इस साल JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन रांची में बड़ा रूप ले चुका है. आंदोलन में 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा समेत कई भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं. छात्र परीक्षा रद्द करने, स्वतंत्र जांच, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ी की CBI जांच की मांग कर रहे हैं.

 

महतो 2 अगस्त से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे. लंबे उपवास के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल भी ले जाना पड़ा. रिपोर्टों के अनुसार उनकी हालत लगातार चर्चा का विषय बनी रही.

 

सोनम वांगचुक से क्यों हो रही तुलना?

महतो के आंदोलन के तरीके की तुलना लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक से भी की जा रही है. दोनों के आंदोलनों में अनशन और शांतिपूर्ण सत्याग्रह का तरीका दिखाई देता है. JPSC-JSSC आंदोलन के दौरान वांगचुक ने भी महतो से वीडियो बातचीत की थी और उनसे बात की थी. इसके बाद "झारखंड का सोनम वांगचुक" नाम सोशल मीडिया और मीडिया चर्चा में और ज्यादा सामने आया. 

 

लाठी से लेकर भूख हड़ताल तक

महतो की राजनीति का सबसे मजबूत पक्ष उनकी आंदोलनकारी छवि है. कभी हाथ में तख्ती, कभी छात्रों के बीच भाषण, कभी पुलिस की कार्रवाई के सामने खड़े महतो और अब कई दिनों की भूख हड़ताल - उनका सार्वजनिक चेहरा लगातार संघर्ष से जुड़ा रहा है.

 

2024 के JSSC प्रदर्शन में हिरासत से लेकर 2026 के आंदोलन में भूख हड़ताल तक उनका रास्ता आसान नहीं रहा. इसी वजह से छात्र आंदोलन के समर्थकों के बीच उनकी पहचान एक ऐसे युवा नेता की बनी है जो परीक्षा और रोजगार के सवाल को सड़क तक ले जाने से पीछे नहीं हटता. 

 

आंदोलन सिर्फ JPSC तक सीमित नहीं

मौजूदा आंदोलन में JPSC के साथ JSSC की परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. छात्रों की मांगों में कथित गड़बड़ी वाली परीक्षाओं को रद्द करना, स्वतंत्र जांच, CBI जांच, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कैटेगरी के अनुसार कटऑफ और OMR तथा रिस्पॉन्स शीट उपलब्ध कराने जैसी मांगें शामिल हैं.

 

10 अगस्त को आंदोलन और ज्यादा तेज हुआ, जब हजारों छात्र विधानसभा की ओर मार्च करने निकले. पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. इस घटना के बाद आंदोलन ने राज्य की राजनीति में भी बड़ा रूप ले लिया.

 

सरकार और छात्रों के बीच बातचीत भी हुई है, लेकिन समाधान नहीं निकला. सरकार का कहना है कि कई मांगों पर काम हुआ है, जबकि आंदोलनकारी अभी भी अपनी प्रमुख मांगों पर कायम हैं. 16 अगस्त तक आंदोलन 23वें दिन में पहुंच चुका था और छात्रों ने आगे आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी थी.

 

एक छात्र नेता से राजनीतिक चेहरे तक

देवेंद्र नाथ महतो की कहानी केवल एक छात्र नेता की कहानी नहीं है. वह उस पीढ़ी का चेहरा भी हैं जो डिग्री के बाद नौकरी चाहती है और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग करती है. छात्र आंदोलन से निकले महतो ने चुनावी राजनीति में भी कदम रखा और लोकसभा तथा विधानसभा दोनों चुनावों में अपनी किस्मत आजमाई.

 

अब उनकी पहचान तीन तस्वीरों में सिमटती दिखती है - छात्र नेता, चुनावी राजनीति का चेहरा और JPSC-JSSC आंदोलनकारी.

 

15 अगस्त की तिरंगा यात्रा में रोके जाने के बाद उनका सवाल - क्या यही आजादी है?  इसी लंबे सफर की नई कड़ी बन गया. एक तरफ हाथ में तिरंगा लिए छात्र सड़क पर थे, दूसरी तरफ भर्ती परीक्षाओं और रोजगार को लेकर सवाल थे. इसीलिए देवेंद्र नाथ महतो का आंदोलन अब सिर्फ एक परीक्षा का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि झारखंड के युवाओं के रोजगार, व्यवस्था पर भरोसे और अपने अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक बनता जा रहा है.

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