- रोजगार की लड़ाई है, राजनीति की नहीं - छात्रों ने कहा, समर्थन दें, लेकिन पार्टी का झंडा नहीं
Ranchi: झारखंड की सड़कों पर इन दिनों सिर्फ नारे नहीं गूंज रहे, बल्कि हजारों युवाओं की बेचैनी भी दिखाई दे रही है. जिन हाथों में कल तक किताबें, नोट्स और एडमिट कार्ड थे, उन्हीं हाथों में आज पोस्टर हैं. जिन आंखों में सरकारी नौकरी का सपना था, उनमें अब व्यवस्था से सवाल हैं.
JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद ने छात्रों को सड़क पर ला दिया है. यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल की घोषणा से नहीं, बल्कि उन अभ्यर्थियों के गुस्से से शुरू हुआ, जिन्होंने वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की. लेकिन बदले में उन्हें कभी परीक्षा रद्द होने की खबर मिली, कभी भर्ती टलने की और कभी जांच की.
छात्रों ने साफ कहा- आंदोलन हमारा है, राजनीति की जरूरत नहीं
गुरुवार को आंदोलन के दौरान छात्रों ने मंच से साफ कहा कि उन्हें किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं चाहिए. उनका कहना था कि अगर कोई उनके आंदोलन का समर्थन करना चाहता है, तो स्वागत है, लेकिन वह किसी भी राजनीतिक दल का झंडा लेकर आंदोलन में नहीं आए.
छात्रों का कहना है कि यह किसी सरकार को गिराने या किसी दल को जिताने का आंदोलन नहीं है. यह उनके भविष्य, रोजगार और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की लड़ाई है.
हालांकि आंदोलन स्थल पर कई राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों के कार्यकर्ता भी नजर आए. कुछ नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग उठाई, तो CBI जांच की मांग को भी राजनीतिक मुद्दा बनाया. लेकिन छात्रों ने बार-बार यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल का मंच नहीं बनेगा.
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आखिर क्यों फूटा छात्रों का गुस्सा?
पिछले कुछ महीनों में हुई घटनाओं ने अभ्यर्थियों का भरोसा लगातार कमजोर किया.
14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम पर अभ्यर्थियों ने गंभीर सवाल उठाए.
कथित अनियमितताओं की जांच CID को सौंपी गई.
जांच के दौरान कई लोगों की गिरफ्तारी हुई.
JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने इस्तीफा दिया.
इसके बाद 25, 26 और 27 जुलाई को प्रस्तावित 14वीं संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा स्थगित कर दी गई.
संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग मुख्य परीक्षा समेत कुल 9 भर्ती परीक्षाओं को अगली सूचना तक टाल दिया गया.
इन घटनाओं ने हजारों अभ्यर्थियों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर उनकी मेहनत का नतीजा कब मिलेगा.
परीक्षा टलती है, तो सिर्फ तारीख नहीं बदलती
एक प्रतियोगी छात्र के लिए परीक्षा स्थगित होना सिर्फ कैलेंडर की तारीख बदलना नहीं होता. उसके साथ बदलती हैं योजनाएं, बढ़ता है आर्थिक बोझ, बढ़ती है उम्र और परिवार की उम्मीदों का दबाव. कई छात्र ऐसे हैं, जो वर्षों से सिर्फ एक परीक्षा और एक नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं.
क्या हैं छात्रों की मांगें?
छात्रों की प्रमुख मांगें हैं.
JPSC और JSSC से जुड़े विवादित मामलों की CBI जांच.
दोषियों पर सख्त कार्रवाई.
पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया.
स्थगित परीक्षाओं की जल्द नई तिथि.
भविष्य में निष्पक्ष और भरोसेमंद भर्ती व्यवस्था.
आंदोलन का असली मुद्दा कहीं पीछे न छूट जाए
प्रदर्शन में शामिल झारखंड के छात्रों ने कहा की वह इस समय सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि व्यवस्था पर भरोसा वापस चाहते हैं. वे चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया ऐसी हो, जिस पर कोई सवाल न उठे. आंदोलन के बीच राजनीतिक दलों की मौजूदगी ने नई बहस जरूर छेड़ दी है, लेकिन छात्रों का संदेश साफ है. यह आंदोलन किसी पार्टी का नहीं, अभ्यर्थियों का है.
झारखंड का यह आंदोलन सिर्फ JPSC या JSSC का विवाद नहीं है. यह उस पीढ़ी की आवाज है, जिसने अपनी जवानी का बड़ा हिस्सा तैयारी में बिताया और बदले में अनिश्चितता पाई. आज छात्र सड़क पर हैं, लेकिन उनकी लड़ाई सत्ता बदलने की नहीं, व्यवस्था बदलने की है. उनके हाथों में पोस्टर हैं, लेकिन उन पोस्टरों के पीछे सिर्फ एक मांग लिखी है. परीक्षा निष्पक्ष हो, भर्ती समय पर हो और मेहनत का सम्मान मिले.
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