Ranchi : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर झारखंड में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था में साफ दिखाई दे रही है. राज्य में कई अहम पदों पर महिलाएं जिम्मेदारी संभाल रही हैं और अपनी कार्यशैली से यह साबित कर रही हैं कि प्रशासन और कानून-व्यवस्था जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी वे प्रभावी नेतृत्व देने में सक्षम हैं. आज झारखंड में न केवल जिलों के प्रशासनिक पदों पर बल्कि पुलिस और गृह विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.
गृह विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहीं वंदना डाडेल
झारखंड सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव के रूप में वंदना डाडेल (IAS) महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही हैं. गृह विभाग राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन, जेल प्रबंधन और आपदा प्रबंधन जैसी अहम व्यवस्थाओं से जुड़ा हुआ है. ऐसे में इस विभाग की कमान संभालना किसी भी अधिकारी के लिए बड़ी जिम्मेदारी मानी जाती है.
वंदना डाडेल लंबे प्रशासनिक अनुभव वाली अधिकारी हैं और उन्होंने विभिन्न विभागों में काम करते हुए अपनी प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया है. उनके नेतृत्व में गृह विभाग राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने, जेल सुधार, आपदा प्रबंधन की तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर करने की दिशा में काम कर रहा है.
झारखंड जैसे राज्य में जहां कई क्षेत्रों में भौगोलिक चुनौतियां और नक्सल प्रभावित इलाके भी रहे हैं, वहां गृह विभाग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. ऐसे में वंदना डाडेल की प्रशासनिक भूमिका राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने में अहम मानी जाती है. उनके नेतृत्व में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और प्रशासनिक कार्यों को सुचारु रूप से चलाने पर जोर दिया जा रहा है.
डीजीपी तदाशा मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस व्यवस्था
झारखंड पुलिस की कमान तदाशा मिश्रा के हाथों में है, जो राज्य की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के रूप में कार्यरत हैं. एक महिला अधिकारी के रूप में राज्य की सर्वोच्च पुलिस पद पर उनकी नियुक्ति महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का बड़ा उदाहरण मानी जाती है.
डीजीपी के रूप में उनकी जिम्मेदारी पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था को बनाए रखना, अपराध नियंत्रण, पुलिस प्रशासन का संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है. उनके नेतृत्व में झारखंड पुलिस अपराध नियंत्रण, साइबर क्राइम पर निगरानी, महिला सुरक्षा और सामुदायिक पुलिसिंग जैसे कई क्षेत्रों में काम कर रही है.
महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा कि जब महिलाएं सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं तो समाज में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है. उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होती है.
डीजीपी तदाशा मिश्रा का मानना है कि पुलिस व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से महिला संबंधित अपराधों की जांच और पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनती है. उन्होंने पुलिस विभाग में महिला कर्मियों की संख्या बढ़ाने और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है.
जिलों में महिला आईएएस संभाल रहीं प्रशासनिक जिम्मेदारी
झारखंड के कई जिलों में महिला आईएएस अधिकारी उपायुक्त के रूप में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रही हैं. ये अधिकारी जिले में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, कानून-व्यवस्था के समन्वय, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाओं को लागू करने में अहम भूमिका निभाती हैं.
खूंटी जिले में R. Ronita (IAS) उपायुक्त के रूप में कार्यरत हैं और जिले में विकास योजनाओं को गति देने के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने में जुटी हैं.
गोड्डा जिले की उपायुक्त Anjali Yadav (IAS) हैं, जो जिले में सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने पर काम कर रही हैं.
सिमडेगा जिले में Kanchan Singh (IAS) उपायुक्त के रूप में तैनात हैं और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सामाजिक योजनाओं के बेहतर संचालन पर विशेष ध्यान दे रही हैं.
गुमला जिले में Prerna Dixit (IAS) उपायुक्त की जिम्मेदारी निभा रही हैं और जिले के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं.
चतरा जिले में Kirtishree G (IAS) उपायुक्त के रूप में तैनात हैं और प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ जन समस्याओं के समाधान पर भी लगातार ध्यान दे रही हैं.
पलामू जिले की उपायुक्त Samira S (IAS) हैं, जो जिले में विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और प्रशासनिक सुधारों के लिए काम कर रही हैं.
इन महिला उपायुक्तों की सक्रियता से कई जिलों में प्रशासनिक कामकाज मं पारदर्शिता और संवेदनशीलता देखने को मिल रही है. विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है.
महिला आईपीएस अधिकारी भी संभाल रहीं पुलिस की कमान
राज्य के कई जिलों में महिला आईपीएस अधिकारी पुलिस अधीक्षक के रूप में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रही हैं.
पलामू जिले में रिष्मा रमेशन (IPS) पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात हैं और जिले में अपराध नियंत्रण तथा पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रही हैं.
पाकुड़ जिले में Nidhi Dwivedi (IPS) पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के साथ-साथ अपराध नियंत्रण पर लगातार निगरानी रख रही हैं.
महिला एसपी के रूप में उनकी कार्यशैली को संवेदनशील और सख्त दोनों माना जाता है. महिला संबंधित अपराधों की सुनवाई में उनकी सक्रियता और पुलिस-जन संवाद को मजबूत करने के प्रयासों को भी सराहा जाता है.
महिला नेतृत्व से बदल रही प्रशासनिक सोच
झारखंड में महिलाओं की बढ़ती प्रशासनिक भागीदारी केवल पदों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन व्यवस्था में एक नई सोच को भी दर्शाती है. महिला अधिकारी अक्सर जन समस्याओं को संवेदनशील दृष्टिकोण से समझती हैं और सामाजिक योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में विशेष रुचि लेती हैं.
महिला दिवस के अवसर पर यह कहा जा सकता है कि झारखंड में महिलाएं अब केवल समाज के एक हिस्से के रूप में नहीं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका में भी मजबूती से आगे बढ़ रही हैं. प्रशासन, पुलिस और नीति निर्धारण जैसे क्षेत्रों में उनकी सक्रिय भागीदारी राज्य में बेहतर शासन और सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है.
आज जब महिलाएं प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जिम्मेदारी निभा रही हैं, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है. महिला दिवस के इस अवसर पर झारखंड की ये महिला अधिकारी यह संदेश दे रही हैं कि अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नेतृत्व करने की क्षमता रखती हैं और समाज को नई दिशा दे सकती हैं.
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