Prayagraj : यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज गुरुवार को सोनीपत (हरियाणा) के मुरथल स्थित बाबा नागे वाला धाम पहुंचे. यहां वे मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और भंडारे में हिस्सा लिया.
कार्यक्रम में नाथ संप्रदाय के संतों, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, इस अवसर पर आयोजित धार्मिक सभा में कहा कि वर्तमान समय में धर्म का मुखौटा लगा कर सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिश की जा रही हैं. ऐसे लोगों से समाज को सतर्क रहना चाहिए.
सीएम योगी ने कहा कि ऐसे कालनेमि लोग बाहर से धार्मिक दिखते हैं, लेकिन भीतर से धर्मविरोधी एजेंडे पर काम कर रहे होते हैं. (कालनेमि एक मायावी असुर था, जिसने साधु का वेश धारण कर हनुमान जी को भ्रमित करने की कोशिश की थी)
योगी आदित्यनाथ ने हालांकि किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी बात सबको समझ में आ गयी कि उनका इशारा किस ओर था. सीएम योगी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को रथ से मौनी अमावस्या पर स्थान करने जाने से रोक दिया गया और नोटिस जारी कर पूछा गया है कि वे खुद को किस आधार पर शंकराचार्य बता रहे हैं.
मुख्यमंत्री के बयान को मौजूदा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है. इस क्रम में सीएम योगी ने कहा कि योगी, संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता. संन्यासी की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती. उसकी असली संपत्ति धर्म होता है राष्ट्र उसका स्वाभिमान होता है.
योगी ने साफ कहा, धर्म केवल वेश या शब्दों में नहीं, बल्कि आचरण में दिखाई देना चाहिए. उन्होंने सलाह दी कि धर्म के नाम पर फैलाये जा रहे भ्रम और दिखावे से सावधान रहना चाहिए.
सीएम ने कहा कि हमें अपने ऋषि-मुनियों, संतों और शास्त्रों द्वारा प्रेरित हर उस प्रतीक का सम्मान करना चाहिए, जिसमें नदियों की अविरलता और निर्मलता बनाए रखना शामिल है, उन्हें प्रदूषित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
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