Ranchi News: झारखंड वन विभाग में अधिकारियों के तबादले और पदस्थापन का मामला फिर सवालों के घेरे में है. स्थापना समिति की बैठक हुए कई सप्ताह बीत चुके हैं. इसके बावजूद तबादले और नई जिम्मेदारियों से जुड़ा आदेश जारी नहीं हुआ है. सबसे ज्यादा असर 2022 और 2023 बैच के युवा भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों पर पड़ रहा है.
ट्रेनिंग और जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी आठ युवा अधिकारी नियमित पदस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे हैं. इन्हें अलग-अलग जिलों में डीएफओ कार्यालयों से संबद्ध किया गया है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन अधिकारियों को चतरा, हजारीबाग, पूर्वी सिंहभूम, बोकारो, पलामू और पश्चिमी सिंहभूम में भेजा गया है. इनमें दो अधिकारी पश्चिमी सिंहभूम में संबद्ध हैं.
सेवा में आने वाले युवा अधिकारियों को फील्ड में जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद रहती है. लेकिन लंबे समय तक नियमित पद नहीं मिलने से उनमें निरसा की साफ झलक देकी जी सकती है. वन सेवा के बड़े अधिकारी भी नाम न छपने की शर्त पर कहा कि सब ठीक-ठाक नहीं है. युवा अधिकारियों के साथ विभाग गलत कर रहा है.
इसे भी पढ़ें -
बैठक हुई, लेकिन आदेश अब तक गायब
अधिकारियों के तबादले और पदस्थापन को लेकर अगस्त के शुरुआती सप्ताह में स्थापना समिति की बैठक हुई थी. बैठक के बाद माना जा रहा था कि जल्द ही अधिसूचना जारी होगी. लेकिन समय बीतने के बाद भी आदेश सामने नहीं आया. विभागीय सूत्रों के अनुसार, फाइल विभिन्न स्तरों पर लंबित है. पदस्थापन सूची में संभावित बदलाव की वजह से भी प्रक्रिया आगे बढ़ने में देरी की चर्चा है.
आठ युवा IFS जिम्मेदारी के इंतजार में
2022 बैच के चार और 2023 बैच के चार अधिकारी नियमित पदस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे हैं. विभाग में सवाल उठ रहा है कि नई पीढ़ी के अधिकारी जिम्मेदारी के लिए इंतजार कर रहे हैं, जबकि कुछ अधिकारी महत्वपूर्ण पदों पर लंबे समय से बने हुए हैं.
विभागीय चर्चा के अनुसार, कुछ अधिकारियों का अहम पदों पर कार्यकाल तीन वर्ष से अधिक हो चुका है. ऐसे में तबादला नीति को समान रूप से लागू करने की मांग भी उठ रही है.
एक तरफ युवा अधिकारी इंतजार में, दूसरी तरफ कई पदों का बोझ
वन विभाग में कुछ अधिकारियों के पास एक से अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होने की भी चर्चा है. वहीं दूसरी ओर नए अधिकारियों को नियमित पद नहीं मिल पा रहा है. इससे विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था और पदस्थापन प्रक्रिया को लेकर असंतोष की स्थिति बन रही है.
प्रमोशन भी अटका, नई जिम्मेदारी पर भी तस्वीर साफ नहीं
तबादले के साथ पदोन्नति का मामला भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. सूत्रों के अनुसार, दो से तीन डीएफओ स्तर के अधिकारियों को चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (CF) रैंक में पदोन्नत किया जाना है. लेकिन प्रमोशन के बाद उनकी नई जिम्मेदारी को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है.
इधर फॉरेस्ट गार्ड भी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं. विभागीय चर्चा है कि कुछ अधिकारी प्रमोशन के बाद मुख्यालय या नीति निर्धारण से जुड़े पदों के बजाय फील्ड में डीएफओ की जिम्मेदारी जारी रखना चाहते हैं. हालांकि संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
प्रतिनियुक्ति का विकल्प तलाश रहे कुछ अधिकारी
नाम नहीं छापने की शर्त पर विभाग के कुछ अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से तबादले और पदस्थापन का मामला लटकने से निराशा बढ़ रही है. कुछ अधिकारी दूसरे राज्यों में प्रतिनियुक्ति के विकल्प पर विचार कर रहे हैं.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.


