Ranchi News: सीपीआई (माओवादी) सेंट्रल कमेटी के सदस्य और 2.20 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली नेता असीम मंडल उर्फ आकाश से पूछताछ का दायरा बढ़ने जा रहा है. पश्चिम बंगाल एसटीएफ फिलहाल असीम मंडल को 10 दिनों की रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है. इसी बीच पूर्वी सिंहभूम पुलिस भी उसे रिमांड पर लेने की तैयारी में जुट गयी है.
असीम मंडल के खिलाफ करीब 100 गंभीर मामले दर्ज हैं. इनमें सबसे ज्यादा 55 मामले पूर्वी सिंहभूम जिले के अलग-अलग थानों में दर्ज हैं. यही वजह है कि पूर्वी सिंहभूम पुलिस असीम को अपनी रिमांड पर लेकर पुराने नक्सली कांडों के साथ संगठन के नेटवर्क, सहयोगियों और हथियारों से जुड़े मामलों में पूछताछ करना चाहती है. इसके लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.
सूत्रों के मुताबिक, झारखंड पुलिस की टीम कोलकाता पहुंच चुकी है. हालांकि इस संबंध में पुलिस अधिकारियों की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गयी है.
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26 साल से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय
असीम मंडल पिछले करीब 26 वर्षों से नक्सली गतिविधियों से जुड़ा रहा है. पूर्वी सिंहभूम और आसपास के इलाकों में हुई कई बड़ी नक्सली घटनाओं में उसका नाम सामने आया है. बाघुड़िया में तत्कालीन सांसद सुनील महतो की हत्या, बुरुडीह लैंडमाइन विस्फोट में 11 जवानों की मौत और धालभूमगढ़ के तत्कालीन बीडीओ के अपहरण समेत कई मामलों में वह नामजद आरोपी रहा है.
झारखंड पुलिस की रिमांड मिलने के बाद इन पुराने मामलों को लेकर भी उससे पूछताछ की जा सकती है. पुलिस संगठन के स्थानीय नेटवर्क, सहयोगियों और हथियारों से संबंधित जानकारी जुटाने की कोशिश करेगी.
गिरफ्तारी के पांच दिन बाद भी AK-47 का पता नहीं
असीम मंडल की गिरफ्तारी को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस को अब तक उसके कथित मुख्य हथियार AK-47 का सुराग नहीं मिला है. पूछताछ के दौरान असीम ने पुलिस को क्या जानकारी दी है, इसकी भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आयी है.
इधर पश्चिम बंगाल पुलिस समीर महतो उर्फ मंगल को साथ लेकर झारखंड-बंगाल सीमा से सटे इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है. पुलिस हथियारों के संभावित ठिकानों के साथ नक्सली नेटवर्क से जुड़े अन्य सुराग तलाश रही है.
पुराने नक्सली मामलों की जांच में मिलेगी नई कड़ी
पूर्वी सिंहभूम में असीम मंडल के खिलाफ दर्ज 55 मामले झारखंड पुलिस की पूछताछ का प्रमुख आधार बन सकते हैं. रिमांड मिलने के बाद पुलिस पुराने मामलों की कड़ियां जोड़ने के साथ यह भी जानने का प्रयास करेगी कि लंबे समय तक इलाके में नक्सली गतिविधियों को संचालित करने में उसका नेटवर्क किस तरह काम करता था. पूछताछ से पुराने नक्सली मामलों में नए सुराग मिलने की संभावना है.
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