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बिहार विधानसभा का 106वां स्थापना दिवस: डिजिटल हाउस का हुआ उद्घाटन

Patna: 7 फरवरी को बिहार विधानसभा का 106 वां स्थापना दिवस मनाया गया. स्थापना दिवस के मौके पर विधानसभा भवन और परिसर को फूलों से सजाया गया. समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, राज्यसभा के डिप्टी स्पीकर हरिवंश सिंह, केन्द्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू, सहित कई दिग्गज नेता शामिल हुए.

 

डिजिटल हाउस का उद्घाटन

106वां स्थापना दिवस पर आज शनिवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने NEVA (नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन) के तहत संचालित डिजिटल हाउस का उद्घाटन किया. इस अवसर पर ‘सशक्त विधायक–सशक्त लोकतंत्र’ विषय पर चर्चा शुरू हुई. जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने अपने विचार रखे. वहीं, डिजिटल हाउस को विधायिका के कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता की दिशा में बड़ा कदम बताया गया.

 

डिजिटिलाइज होंगे सभी विधानसभा

डिजिटल हाउस के उद्घाटन के मौके पर लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि बिहार में राजनीतिक नेतृत्व के साथ ही राजनीतिक चिंतन भी रहा है. हमारे जनप्रतिनिधि जितने सशक्त होंगे, जनता की अपेक्षाएं पूरी होगी. उन्होंने कहा कि 2026 के अंत तक देश की सभी विधानसभाओं का डिजिटाइजेशन कर दिया जाएगा. शासन में पारदर्शिका और जवाबदेगी सबसे जरूरी है.’

 

सीएम नीतीश नहीं हुए शामिल

बिहार विधानसभा के संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समारोह में नहीं शामिल होने पर कहा कि वह पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कारण समारोह में शामिल नहीं होंगे. सीएम नीतीश कुमार की शुभकामनाएं साझा की. साथ ही उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 104 को अप्रासंगिक बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग लोकसभा अध्यक्ष से की. 

 

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 104 संसद के सदस्यों पर दंड का प्रावधान करता है. यदि कोई सदस्य शपथ लिए बिना या अयोग्य होने के बाद या प्रतिबंधित होने के बावजूद भी सदन में बैठता या मतदान करता है, तो उसे प्रतिदिन 500 रुपए का जुर्माना देना होगा.

 

लोकतंत्र केवल चुनाव से नहीं

बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव से नहीं, बल्कि संस्थाओं की गरिमा और जनता की सहभागिता से मजबूत होता है. उन्होंने सदस्यों से सकारात्मक आलोचना और सदन की मर्यादा व परंपरा बनाए रखने की अपील की.

 

7 फरवरी 1921 को स्थापित हुई थी विधानसभा

बता दें, बिहार विधानसभा की स्थापना 7 फरवरी 1921 को हुई थी. जिसकी पहली बैठक सर वाल्टर मोरे की अध्यक्षता में हुई थी. इस पहली बैठक में निर्वाचित प्रांतीय परिषद के सदस्य शामिल हुए थे. विधानसभा ने 106 वर्षों में लंबा और एतिहासिक सफर तय किया है. जिसमें विधानसभा ने औपनिवेशिक काल से लेकर भारत का आधुनिक लोकतांत्रिक सफर का गवाह बना है.

 

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