Ranchi : राज्य में सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारियों की समय पर पहचान के लिए बड़ा अभियान शुरू किया जा रहा है. इसके तहत शून्य से पांच वर्ष और 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के करीब 1.40 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी. इस काम के लिए राज्य सरकार ने निजी एजेंसी को जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया है. फिलहाल इसके लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है. पूरे राज्य के 24 जिलों को तीन अलग-अलग क्लस्टर में बांटकर चरणबद्ध तरीके से जांच कराई जाएगी.
स्वास्थ्य विभाग की ओर से एजेंसी को हर महीने जांच का लक्ष्य दिया जाएगा. खास बात यह है कि लोगों के सैंपल घर-घर जाकर लिए जाएंगे, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान में शामिल किया जा सके. चयनित एजेंसी फील्ड में काम करने के लिए जरूरी स्टाफ और संसाधन उपलब्ध कराएगी. जांच के लिए एचपीएलसी तकनीक के साथ ड्राइड ब्लड स्पॉट सैंपल का उपयोग किया जाएगा, जिससे सटीक परिणाम मिल सकें.
जांच के बाद सभी रिपोर्ट नेशनल सिकल सेल पोर्टल पर अपलोड की जाएंगी. इसके साथ ही जरूरतमंद लोगों को जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड भी दिए जाएंगे और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे. सरकार का उद्देश्य स्क्रीनिंग, सैंपल कलेक्शन और ट्रांसपोर्टेशन की प्रक्रिया को मजबूत बनाना है, ताकि इन बीमारियों की समय रहते पहचान हो सके और इनके प्रसार को कम किया जा सके.
पूरे अभियान की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा. इससे फील्ड में चल रहे काम और रिपोर्ट की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी.
गौरतलब है कि सिकल सेल और थैलेसीमिया दोनों ही हीमोग्लोबिन से जुड़ी वंशानुगत बीमारियां हैं. भारत में थैलेसीमिया से प्रभावित बच्चों की संख्या काफी अधिक है और झारखंड में भी इसका असर देखने को मिलता है. सिकल सेल एनीमिया को केंद्र सरकार ने दिव्यांगता की श्रेणी में भी शामिल किया है.
इसके अलावा राज्य में ब्लड बैंकों के सुदृढ़ीकरण और संचालन की जिम्मेदारी भी निजी एजेंसी को सौंपी जाएगी. रक्त की कमी को दूर करने के लिए ब्लड बैंकों को मजबूत किया जाएगा और रक्तदान शिविरों का आयोजन भी एजेंसी के जरिए कराया जाएगा.
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