Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य के शहरों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. नगर विकास एवं आवास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 154 करोड़ रुपये के अनुदान को मंजूरी दे दी है. इस संबंध में विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार के हस्ताक्षर से 22 जुलाई को आदेश जारी किया गया है. यह राशि नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी.
सरकार ने सभी शहरी निकायों को तीन अलग-अलग प्रक्षेत्रों में बांटकर राशि आवंटित की है. OSP प्रक्षेत्र के तहत धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग और मेदिनीनगर नगर निगम समेत कुल 25 शहरी निकायों को 73 करोड़ 96 लाख 20 हजार रुपये दिए गए हैं. SCSP प्रक्षेत्र में सबसे अधिक 49 शहरी निकाय शामिल किए गए हैं. इनके लिए 15 करोड़ 84 लाख 80 हजार रुपये मंजूर किए गए हैं. TSP प्रक्षेत्र के तहत रांची नगर निगम, जमशेदपुर अक्षेस, मानगो और आदित्यपुर नगर निगम समेत 24 शहरी निकायों को 64 करोड़ 19 लाख रुपये दिए गए हैं. इन तीनों प्रक्षेत्रों को मिलाकर कुल 154 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है.
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सरकार ने कहा है कि इस राशि का उपयोग केवल शहरी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा. इससे शहरों में स्ट्रीट लाइट लगाई जाएंगी, जलाशयों का संरक्षण होगा, नए पार्क बनाए जाएंगे और चौक-चौराहों व डिवाइडरों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा. इसके अलावा श्मशान घाट और नालियों का निर्माण भी होगा.
कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए फॉगिंग मशीन, टावर लैडर, टैंकर और अन्य जरूरी उपकरण खरीदे जाएंगे. वहीं टाउन हॉल, सामुदायिक भवन, वृद्धाश्रम, रैन बसेरा, विवाह भवन और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण भी इस राशि से किया जा सकेगा. पहले से चल रही जलापूर्ति योजनाओं के संचालन और रखरखाव पर भी यह राशि खर्च की जाएगी.
विभाग ने साफ निर्देश दिया है कि स्वीकृत राशि का उपयोग केवल तय किए गए कार्यों पर ही होगा. किसी दूसरे काम में इस राशि का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा.
सरकार ने योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए कई सख्त नियम भी तय किए हैं. सभी काम प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से कराए जाएंगे और कोशिश होगी कि चालू वित्तीय वर्ष के भीतर ही कार्य पूरे कर लिए जाएं. निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी योजना में राशि का दोहरा भुगतान न हो. साथ ही वित्तीय नियमों और झारखंड कोषागार संहिता-2016 का पूरी तरह पालन करना होगा.
भारतीय अंकेक्षण एवं लेखा विभाग को इन योजनाओं से जुड़े सभी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच करने का अधिकार रहेगा. वहीं खर्च की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र तय प्रारूप में महालेखाकार, झारखंड को भेजना होगा. इसकी एक प्रति नगर विकास एवं आवास विभाग को भी उपलब्ध करानी होगी. सरकार का मानना है कि इस राशि से राज्य के शहरों में बुनियादी सुविधाएं मजबूत होंगी और लोगों को बेहतर नागरिक सुविधाएं मिल सकेंगी.
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