- एक महीने में तीन शो-कॉज नोटिस, खान विभाग के दो दर्जन से अधिक फाइलों के लटके रहने के पीछे की मंशा पर उठ रहे सवाल
Ranchi/Deoghar: इन दिनों देवघर का प्रशासनिक महकमा चर्चा का विषय बना हुआ है. वजह है डीसी और जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) के बीच बढ़ता टकराव. दोनों अधिकारियों के बीच मतभेद अब विभागीय कार्रवाई तक पहुंच गया है. बताया जा रहा है कि पिछले एक महीने के दौरान डीसी ने जिला खनन पदाधिकारी को तीन बार शो-कॉज नोटिस जारी किया. आरोप लगाया गया कि डीएमओ बिना पूर्व सूचना मुख्यालय से बाहर चले जाते हैं और विभागीय बैठकों में अनुपस्थित रहते हैं.
बैठक में हुई तीखी नोकझोंक
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में डीएमएफटी (DMFT) से संबंधित महत्वपूर्ण बैठक के दौरान डीसी और डीएमओ के बीच खुली बहस हो गई. बैठक में मौजूद अन्य अधिकारी भी इस घटनाक्रम से हैरान रह गए.
बताया जाता है कि डीएमओ ने विभाग से जुड़ी दो दर्जन से अधिक फाइलों को बिना कारण लंबित रखने पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पट्टा ट्रांसफर, डीड रिन्यूअल और एलओआई (LOI) स्वीकृति से जुड़े मामलों में सभी औपचारिकताएं पूरी कर फाइलें उपायुक्त कार्यालय भेजी गई थीं, फिर भी उन्हें वापस कर दिया गया. उनका कहना था कि इससे विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं और आवेदकों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है.
मिली जानकारी के अनुसार, फाइलें रोकने के पीछे की मंशा पर जिला के अधिकारी चर्चा भी कर रहे है.
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डीसी ने लगाए गंभीर आरोप
विवाद यहीं नहीं रुका. देवघर उपायुक्त ने जिला खनन पदाधिकारी की कार्यशैली और अनुशासन पर सवाल उठाते हुए उन्हें हटाने की अनुशंसा सरकार से कर दी. विभाग को भेजे पत्र में डीसी ने लिखा कि जिला खनन पदाधिकारी का कार्य निष्पादन और कार्यालय संचालन संतोषजनक नहीं है. वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति उनका व्यवहार भी अपेक्षित स्तर का नहीं है.
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि डीएमओ बिना अनुमति कई बार मुख्यालय छोड़ देते हैं. इस संबंध में पहले भी स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया. डीएमएफटी (DMFT) की महत्वपूर्ण बैठक में अनुपस्थित रहने को लेकर दोबारा स्पष्टीकरण मांगा गया, जिसका उत्तर भी असंतोषजनक बताया गया.
सक्षम अधिकारी की प्रतिनियुक्ति की मांग
डीसी ने सरकार से अनुरोध किया है कि जिला खनन पदाधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उनके स्थान पर किसी सक्षम और अनुभवी अधिकारी की प्रतिनियुक्ति की जाए, ताकि खनन विभाग का कार्य सुचारु रूप से संचालित हो सके.
चर्चाओं का बाजार गर्म
इस पूरे घटनाक्रम के बाद देवघर प्रशासन में तरह-तरह की चर्चाएं हैं. प्रशासनिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि खनन विभाग से जुड़ी कई फाइलें उपायुक्त स्तर पर लंबित या वापस किए जाने के पीछे आखिर वजह क्या है. हालांकि इन चर्चाओं और आरोपों पर किसी भी पक्ष की ओर से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए डीएमओ और डीसी को फोन भी किए गये, लेकिन पक्ष मिल नहीं सका.
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