- मौत के बाद भी किसी की जिंदगी में रोशनी देने का संदेश
Ranchi News : राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के मौके पर RIMS के राजकीय नेत्र अधिकोष और क्षेत्रीय नेत्र संस्थान ने नेत्रदाता परिवार सम्मान समारोह का आयोजन किया. RIO भवन के पांचवें तले स्थित ऑडिटोरियम में हुए कार्यक्रम में नेत्रदान करने वाले 20 परिवारों को स्मृति चिह्न और शॉल देकर सम्मानित किया गया.
कार्यक्रम का शुभारंभ रिम्स निदेशक प्रो. (डॉ.) डीके सिन्हा, मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो (डॉ) हिरेंद्र बिरुआ, स्टेट ब्लाइंडनेस कंट्रोल ऑफिसर डॉ पंकज कुमार और आरआईओ के एचओडी प्रो. (डॉ) सुनील कुमार ने दीप जलाकर किया. समारोह में करीब 150 लोग शामिल हुए.
नेत्रदाता परिवारों के अलावा नेत्रदान के लिए लोगों को प्रेरित करने और कॉर्निया संग्रह में मदद करने वाले न्यूरोसर्जरी विभाग और ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को भी सम्मानित किया गया. इन कर्मचारियों ने मृत्यु के बाद नेत्रदान के लिए परिवारों को समझाने और समय पर नेत्रदान की सूचना देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
आरआईओ के एचओडी और राजकीय नेत्र अधिकोष के मेडिकल डायरेक्टर प्रो. (डॉ) सुनील कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नेत्रदान सिर्फ किसी को आंखों की रोशनी देने का काम नहीं है, बल्कि यह मृत्यु के बाद भी किसी की जिंदगी में रोशनी लाने का बड़ा मानवीय कार्य है.
उन्होंने नेत्रदाता परिवारों के फैसले को समाज के लिए प्रेरणा बताया. उन्होंने लोगों से नेत्रदान को लेकर फैली गलत धारणाओं को दूर करने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को नेत्रदान के लिए आगे आने की अपील की. (रांची की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...)

रिम्स में नेत्रदाता परिवार सम्मान समारोह का आयोजन
रिम्स निदेशक प्रो. (डॉ.) डी.के. सिन्हा ने नेत्रदाता परिवारों का आभार जताते हुए कहा कि नेत्रदान समाज के लिए बड़ी सेवा है. RIMS में नेत्रदान और कॉर्निया ट्रांसप्लांट की सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए हरसंभव सहयोग दिया जाएगा.
मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. (डॉ.) हिरेंद्र बिरुआ ने कहा कि नेत्रदान को सफल बनाने में अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है. उन्होंने न्यूरोसर्जरी और ट्रॉमा सेंटर के कर्मचारियों के योगदान की सराहना की.
स्टेट ब्लाइंडनेस कंट्रोल ऑफिसर डॉ. पंकज कुमार ने कहा कि नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना अंधापन कम करने की दिशा में जरूरी कदम है. उन्होंने लोगों से मृत्यु के बाद नेत्रदान का संकल्प लेने और अपने परिवार के सदस्यों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की.
राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के दौरान आयोजित चित्रकला और स्लोगन लेखन प्रतियोगिता के प्रतिभागियों और विजेताओं को भी कार्यक्रम में पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया. विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता के जरिए नेत्रदान का संदेश लोगों तक पहुंचाया. कार्यक्रम में कहा गया कि बच्चों और युवाओं को नेत्रदान अभियान से जोड़ने से आने वाले समय में इसे बड़े जनआंदोलन का रूप दिया जा सकता है.
समारोह में जीतेंद्रनाथ माझी, द्रोपदी कुमारी, सुजीत सिंह, किशन इंदवार, गायत्री देवी, दीपाली पॉल, हीरा उरांव, शुभम मुंडा, प्रमोद मुंडा, अजय सिंह, बाबूलाल, तेजराय टोप्पो, सुन्नी आदित्य मुंडा, सचिन करमाली, हलधर बैठा, संजीव पॉल कांके, अमित कुमार, इंदु पटेल, धापी देवी साबू और सुमनी मिंज के परिवारों को सम्मानित किया गया.
बता दें कि राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से शुरू हुआ है, जो 8 सितंबर तक चलेगा. समारोह का मुख्य उद्देश्य है कि नेत्रदान करने वाले परिवारों को सम्मानित करने के अलावा लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करना है. वहीं इस समारोह के जरिये संदेश दिया जा रहा है कि नेत्रदान के जरिए मृत्यु के बाद भी किसी की जिंदगी में रोशनी लायी जा सकती है.
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