NewDelhi : NEET समेत कई परीक्षाओं में उजागर हुई अनियमितताओं के बीच खबर आयी है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के परीक्षा विभाग में लगभग 44 फीसदी पद खाली हैं. कुल 2,117 स्वीकृत पदों में से 933 (44फीसदी प) पद खाली हैं.
संसद की प्राक्कलन समिति ने बुधवार को पेश अपनी रिपोर्ट में 44 फीसदी पद खाली होने पर चिंता जताई है. समिति ने कहा है कि परीक्षा विभाग संवेदनशील और गोपनीय कामों के लिए ठेका कर्मचारियों पर निर्भर है. इस कारण परीक्षा की शुचिताऔर सुरक्षा प्रभावित होने का खतरा बरकरार है.
प्राक्कलन समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि परीक्षा संचालन संवेदनशील कार्य है. इसके लिए पर्याप्त संख्या में नियमित कर्मचारी होने चाहिए, जबकि ऐसा नहीं है.
कर्मचारियों की भारी कमी के कारण सीबीएसई के मौजूदा कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है. साथ ही ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है.
समिति ने कहा है कि सीबीएसई की परीक्षा व्यवस्था में प्रश्नपत्र, परीक्षा संचालन और अन्य प्रक्रियाएं बेहद संवेदनशील होती हैं. इसलिए इन व्यवस्था संभालने के लिए नियमित और पर्याप्त कर्मचारी होने अति आवश्यक है.
समिति के अनुसार विभाग(सीबीएसई) में लगभग 44 फीसदी पद खाली होने की स्थिति में ठेका कर्मचारियों की बढ़ती भूमिका परीक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है.
प्राक्कलन समिति ने देश में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़ी अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के क्रियान्वयन को लेकर भी चिंता जाहिर की है.
रिपोर्ट के अनुसार एनईपी लागू होने के बावजूद 10वीं-12वीं कक्षा में कई स्थानों पर छात्रों को पुरानी पुस्तकों से पढ़ाया जा रहा है. समिति के अनुसार एनईपी के अनुरूप पाठ्यक्रम और किताबों में जरूरी बदलाव नहीं होने के कारण छात्रों पर पढ़ाई का प्रेशर बढ़ रहा है.
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