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झारखंड की जेलों में 63% पद खाली: वर्तमान में जेल का 1 कर्मचारी औसतन 3 लोगों का काम करने को मजबूर

झारखंड की जेलों में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण कैदियों की देखरेख और सुधारात्मक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की 'प्रिजन स्टैटिस्टिक्स ऑफ इंडिया 2024' रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की जेलों में कुल स्वीकृत पदों में से लगभग 62.9% पद खाली पड़े हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि वर्तमान में जेल का एक कर्मचारी औसतन तीन लोगों का काम करने को मजबूर है.
 

Ranchi : झारखंड की जेलों में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण कैदियों की देखरेख और सुधारात्मक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की 'प्रिजन स्टैटिस्टिक्स ऑफ इंडिया 2024' रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की जेलों में कुल स्वीकृत पदों में से लगभग 62.9% पद खाली पड़े हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि वर्तमान में जेल का एक कर्मचारी औसतन तीन लोगों का काम करने को मजबूर है.


आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की 32 जेलों में कुल 2,721 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 1,008 कर्मचारी ही कार्यरत हैं. रिक्त पदों की संख्या 1,713 तक पहुंच गई है, जिसमें जेलर और सहायक जेलर जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं. रिपोर्ट बताती है कि 29 स्वीकृत जेलर पदों में से केवल 6 और 67 सहायक जेलरों में से भी मात्र 6 ही तैनात हैं.

 

कर्मचारियों की इस कमी का सीधा असर कैदियों के पुनर्वास और सुधारात्मक गतिविधियों पर पड़ रहा है. 'इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2025' में भी झारखंड की स्थिति को चिंताजनक बताया गया है, जहां राज्य को जेल प्रबंधन के मामले में 18 बड़े और मध्यम राज्यों की सूची में 17वें स्थान पर रखा गया है.

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