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ट्राइबल क्रिएटर्स मीट में शामिल हुए 7 राज्यों के 70 क्रिएटर्स

आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति, भाषा, व्यापार, मार्गदर्शन को नई दिशा देने के उद्देश्य से ट्राइबल क्रिएटर्स मीट का आयोजन रेडिएशन ब्लु होटल में हुआ
 

Ranchi: आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति, भाषा, व्यापार, मार्गदर्शन को नई दिशा देने के उद्देश्य से ट्राइबल क्रिएटर्स मीट का आयोजन रेडिएशन ब्लु होटल में हुआ. इमसें पहली बार 60-70 युवा क्रिएटर्स एक मंच पर जुटे. इसमें पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़,असम, कोलकाता, ओडिशा समेत अन्य राज्यों के युवा ब्लॉगर्स मौजूद रहे. मुख्य अतिथि खिजरी विधायक राजेश कच्छप और जेएससीए के अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव शामिल हुए.


 
इस मौके पर खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने कहा कि आदिवासी समाज की भाषा और संस्कृति अलग हो सकती है, लेकिन सोच एक ही है. आदिनिवास ऐप में अपनी विरासत को रख सकते हैं.वहीं अजयनाथ शाहदेव ने कहा कि डिजिटल क्रिएटर्स को देशभर में पहुंचाने की जरूरत है. आज आदिवासी समाज सदियों से प्राकृति की पूजा करते आ रहे हैं. पूर्वज जल,जंगल की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं. आज डिजिट्ल प्लेटफॉर्म में आदिवासी युवा अपनी पहचान बना रहे हैं.

 


मई में ट्राइबल क्रिएटर्स का होगा भव्य आयोजन,सीएम होंगे मुख्य अतिथि


आयोजकों ने बताया कि मई में ट्राइबल क्रिएटर्स मीट का भव्य आयोजन होना है. जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. इसमें पश्चिम बंगाल, मुंबई, असम, कोलकाता, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के प्रतिभागी शामिल होंगें. आयोजकों ने बताया कि यह सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि एक विजन और मूवमेंट है. जिसकी शुरुआत वर्ष 2025 में दिल्ली में की गई थी. इसका मकसद आदिवासी समाज को उनकी जड़ों से जोड़ना है. उन्हें आधुनिक अवसरों से रूबुरू कराना है. आदिवासी समाज की छह प्रमुख वर्टिकल बनाए गए हैं.

 


आदिनिवास ऐप से जुड़कर बन सकते है आत्मनिर्भर 

आदिनिवास ऐप से शहर से गांव स्तर पर सभी प्रोफेशनल्स जुड़ सकते हैं. वहीं ट्राइबल व्यवसाय के जरिए छोटे उद्यमियों और व्यवसायों से जुड़े लोगों को भी इस आदिनिवास ऐप में जोड़कर रखना है. उन्हें बाजार उपलब्ध कराना है. इसके साथ ही रोजगार के क्षेत्र में जॉब वैकेंसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से आदिवासी युवाओं को रोजगार से जोड़ना है. ट्राइबल संगिनी के माध्यम से युवा-युवतियों को भी जोड़ा जा रहा है. आदिनिवास नेटवर्क अब दिल्ली से निकलकर रांची छत्तीसगढ़,अंडमान-निकोबार समेत कई राज्यों तक पहुंच चुका है. 

 


आदिवासी भाषाओं के संरक्षण और प्रचार पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है. इस अभियान में नितिन कैल्विन कुजूर, सौरभ कुल्लू, संजीत टोप्पो (झारखंड स्टेट हेड), अभिषेक मिंज (छत्तीसगढ़ हेड) और ऐरे केरकेट्टा जैसे युवा जुड़े हैं.

 

 

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