Ranchi : झारखंड में कुपोषण की गंभीर समस्या को देखते हुए रिम्स में राज्य उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की गई है. यह केंद्र यूनिसेफ, महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयास से शुरू हुआ है. इसका उद्देश्य राज्य सरकार को तकनीकी मसहयोग प्रदान करना, कुपोषण की योजनाओं को वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मजबूत करना और जिलों में लागू नीतियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाना है.
दो प्रमुख अध्ययन से मिले अहम निष्कर्ष
- - आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मिलकर घर-घर जाकर प्रारंभिक कुपोषण की पहचान कर सकती हैं.
- - उम्र के अनुसार पोषण देने से बच्चों की सेहत में तेजी से सुधार होता है.
- - दूसरे और चौथे महीने की अतिरिक्त विज़िट से बच्चों में रिकवरी दर बढ़ती है.
- - स्तनपान संबंधी समस्याओं को पहचानने और हल करने के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता है.
‘शिशु शक्ति’ : गंभीर कुपोषण से लड़ने वाला पोषण आहार
इस पहल का एक अनूठा हिस्सा है शिशु शक्ति’, यह एक ऊर्जा और प्रोटीन युक्त टेक-होम राशन (THR), जिसे विशेष रूप से अति गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए तैयार किया गया है. इसे रिम्स, यूनिसेफ, निन और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने मिलकर तैयार किया है.
शिशु शक्ति की खासियत
- - 100 ग्राम में 490 कैलोरी और 17 ग्राम प्रोटीन
- - दूध पाउडर आधारित बेहतर प्रोटीन गुणवत्ता
- - बच्चों की उम्र के अनुसार खुराक (6 माह के लिए 90 ग्राम और 3-5 साल के लिए 160 ग्राम)
- - आकर्षक पैकेजिंग और मापने वाला स्कूप
- - पकाने की आवश्यकता नहीं, खाने के लिए तैयार
- - सुरक्षित भंडारण के लिए सील पैक डिब्बा.
चक्रधरपुर फील्ड ट्रायल में सकारात्मक परिणाम
जनवरी से मई 2025 के बीच चक्रधरपुर में हुए फील्ड ट्रायल में 139 अति गंभीर कुपोषित बच्चों को शिशु शक्ति दिया गया. 124 बच्चों को छुट्टी मिली, जिनमें से 97 बच्चे (78%) ठीक हो गए 18 बच्चों में सुधार नहीं हुआ. जबकि 8 बीच में ही छूट गए. माताओं ने शिशु शक्ति को पंसद किया और इसे स्वादिष्ट, सुविधाजनक और सुरक्षित बताया.
टीम ने की शिशु शक्ति देने की मांग
टीम ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि सामान्य टेक-होम राशन की जगह अति गंभीर कुपोषित बच्चों को ‘शिशु शक्ति’ दिया जाए, जिससे उनकी रिकवरी दर तेज और स्थायी हो सके.
झारखंड में कुपोषण की चिंताजनक स्थिति:
- - 5 साल से कम उम्र के 22% बच्चे कुपोषित
- - 9.1% बच्चे अति गंभीर रूप से कुपोषित (SAM)
- - 6 माह तक के 32% बच्चे कुपोषण से ग्रसित
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