Ranchi: लघु खनिज समानुदान नियमावली (JMMC Rule) में संशोधन से राज्य में चल रहे 5000 करोड़ रुपये का विकास कार्य प्रभावित हुआ है. इसमें पथ,भवन,जल संसाधन सहित अन्य वर्क्स विभाग से जुड़े निर्माण कार्य शामिल हैं. बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने राज्य के मुख्यमंत्री सहित वर्कस डिपार्टमेंट के सचिवों को JMMC Rule के पहले के प्रावधानों को लागू रखने का अनुरोध किया है. इस पर विचार करने के लिए सरकार ने अभियंता प्रमुख की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है.
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने JMMC Rule की धारा 15 को समाप्त कर दिया है. इस धारा के तहत पहले निर्माण कार्यों में लगे ठेकेदारों को लघु खनिजों का वैध दस्तावेज नहीं देने की स्थिति में खनिजों पर लगने वाले रॉयल्टी का दोगुना पैसा सरकार को देना पड़ता था. करीब तीन साल पहले महालेखाकार ने नियमावली के नियम 15 पर आपत्ति की थी.
महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा था कि इस प्रावधान से राज्य में अवैध खनन या निर्माण कार्यों में अवैध खनिजों (पत्थर,बालू,मिट्टी,मोरम आदि) का इस्तेमाल बढ़ा है. महालेखाकार ने इसके लिए निर्माण कार्यों में लगे लघु खनिजों से मिली रॉयल्टी और बगैर किसी दस्तावेज के इस्तेमाल किये गये खनिजों से मिली रॉयल्टी का तुलनात्मक ब्योरा पेश किया था.
इसके बाद राज्य सरकार ने JMMC Rule के नियम 15 को समाप्त कर दिया और 27 अप्रैल को गजट प्रकाशित कर इसे प्रभावित कर दिया. इस नियम को समाप्त करने की वजह से निर्माण कार्यों में वैध ई-चालान जमा करने पर ही ठेकेदारों को भुगतान की व्यवस्था लागू हो गयी. इसके बाद विभिन्न कार्य प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंताओं के स्तर से आदेश जारी किया गया. इसमें इस बात का उल्लेख किया गया कि निर्माण कार्य में लगे ठेकेदारों द्वारा लघु खनिजों का बैध ई-चालान नहीं देने पर उन्हें भुगतान नहीं किया जायेगा. इससे राज्य में चल रहे करीब 5000 करोड़ रुपये का विकास कार्य प्रभावित हुआ.
इसके बाद बिल्डर्स एसोसियेशन ऑफ इंडिया ने राज्य के मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर ठेकेदारों द्वारा लघु खनिजों का बैध चालान नहीं देने की स्थिति में उनसे दंड लेने के पुराने प्रावधान को ही लागू रखने का अनुरोध किया. एसोसिएशन की ओर से दिये गये ज्ञापन में कहा गया कि लघु खनिजों का रॉयल्टी चालान समय पर नहीं मिल पाया है.
कई परिस्थितियों में चालान उपलब्ध नहीं होता है या मिलना बहुत ही मुश्किल होता है. इससे निर्माण कार्य रोकने की नौबत आ सकती है. इससे राज्य की अधिकांश परियोजनाएं ठप्प हो सकती है.
एसोसिएशन के ज्ञापन में कहा गया है कि युद्ध की वजह से निर्माण सामग्री और इंधन मंहगा हो गया है. ई-चालान जमा नहीं होने की वजह से रनिंग बिल का भुगतान बाधित हो रहा है. इससे वर्किंग कैपिलट ब्लॉक हो जायेगा. इससे राज्य में चल रहे निर्माण कार्य ठप्प हो सकते हैं. इसलिए जब तक लघु खनिजों के ई-चालान की कोई व्यवस्था नहीं हो जाती है, तब तक पुरानी व्यवस्था को लागू रखें.
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