Ranchi News : शिक्षक दिवस के अवसर पर रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में आज विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सरोज शर्मा, कुलसचिव समेत कई विश्वविद्यालय पदाधिकारी, शिक्षक व अन्य लोग मौजूद रहे.
इस दौरान देश के प्रथम उपराष्ट्रपति व महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद किया गया. साथ ही RU@60 किताब का भी विमोचन हुआ जिसमे रांची विश्वविद्यालय के 65 साल के सफर की दास्तान और आगे विश्वविद्यालय की का उद्देश्य है, विस्तारित रूप से साझा किये गए हैं.
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों के विद्यार्थियों के प्रति दायित्व और विद्यार्थियों के जीवन में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की गई. वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं होते, बल्कि उन्हें सही दिशा दिखाने और उनके व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. शिक्षक और विद्यार्थी के बीच मजबूत संबंध बेहतर शैक्षणिक वातावरण के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है.
कार्यक्रम में रांची विश्वविद्यालय के परफॉर्मिंग आर्ट्स विभाग की ओर से सांस्कृतिक नृत्य और माइम की प्रस्तुति दी गई. माइम के माध्यम से एक मां के संघर्ष और अपने बच्चे की रक्षा के लिए उसके समर्पण को दर्शाया गया. प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया और परिवार, संघर्ष एवं संरक्षण के महत्व को प्रभावी ढंग से सामने रखा.
इस अवसर पर सेवानिवृत्त शिक्षकों ने भी अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने अपने शिक्षण काल के संस्मरण बताते हुए शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि बदलते समय में शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच संवाद बढ़ाना जरूरी है, ताकि दोनों के बीच विश्वास और सम्मान का रिश्ता कायम रहे.
रांची विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सरोज शर्मा ने कहा कि आज महान शिक्षाविद् और देश के प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती है. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और राधाकृष्णन आयोग के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण संस्तुतियां दीं.
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन का दौर चल रहा है. ऐसे में शिक्षक दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि शिक्षकों के अपने दायित्वों को याद करने और उनका पूरी निष्ठा से निर्वहन करने का अवसर भी है. डॉ. राधाकृष्णन ने अपना पूरा जीवन एक आदर्श शिक्षक के रूप में बिताया और कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं, जो आज भी समाज और शिक्षा जगत के लिए प्रेरणास्रोत हैं.
कुलपति ने कहा कि शिक्षक समाज के मार्गदर्शक होते हैं. रांची विश्वविद्यालय यह संकल्प लेता है कि शिक्षकों को मिले इस महत्वपूर्ण दायित्व का पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निर्वहन किया जाएगा. उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों के साथ बेहतर संवाद और मजबूत संबंध स्थापित करने की दिशा में निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया.

