- महासचिव बोले- संगठन ने डीजीपी को हटाने की मांग नहीं की, फर्जी पत्र जारी करने वालों के खिलाफ साइबर थाने में दर्ज कराई जाएगी शिकायत
Ranchi News: झारखंड पुलिस एसोसिएशन के नाम से डीजीपी तदाशा मिश्रा को पद से हटाने की मांग से जुड़ा एक पत्र सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है. हालांकि पुलिस एसोसिएशन के महासचिव संजीव कुमार सिंह ने इस पत्र को पूरी तरह फर्जी बताया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन की ओर से डीजीपी को पद से हटाने की कोई मांग नहीं की गई है. उनका कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर संगठन को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं.
संजीव कुमार सिंह ने कहा कि पुलिस विभाग में डीजीपी गार्जियन की भूमिका में होते हैं. सरकार ने उन्हें इस पद पर नियुक्त किया है. ऐसे में पुलिस एसोसिएशन कभी नहीं चाहेगा कि उन्हें पद से हटाया जाए. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर संगठन के नाम से जो पत्र प्रसारित किया जा रहा है, वह फर्जी है. उस पत्र पर किसी का हस्ताक्षर भी नहीं है.
साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी
महासचिव संजीव कुमार सिंह ने कहा कि पूरे मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है. संगठन जल्द ही साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएगा और मामले की जांच की मांग करेगा. उन्होंने कहा कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि पुलिस एसोसिएशन के नाम से फर्जी पत्र किसने तैयार किया और इसे किसने मीडिया तक पहुंचाया.
उन्होंने बताया कि इस मामले में जांच कमेटी गठित करने पर भी विचार किया जाएगा, ताकि पत्र जारी होने के पूरे घटनाक्रम का पता लगाया जा सके. संगठन यह जानना चाहता है कि आखिर किन लोगों ने पुलिस एसोसिएशन को बदनाम करने के उद्देश्य से इस तरह का पत्र को मीडिया तक पहुंचाया.
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डीजीपी और मुख्य सचिव को लेकर अफवाह फैलाने का आरोप
संजीव कुमार सिंह ने कहा कि कुछ लोग लगातार इस तरह की साजिश रच रहे हैं. कभी डीजीपी को हटाने की मांग के नाम पर तो कभी मुख्य सचिव को हटाने की बात कहकर संगठन को विवादों में घसीटने की कोशिश की जाती है. उन्होंने साफ कहा कि पुलिस एसोसिएशन ने न तो डीजीपी को हटाने की मांग की है और न ही संगठन की ओर से इस तरह का कोई पत्र जारी किया गया है.
उन्होंने कहा कि संगठन पुलिसकर्मियों की समस्याओं और उनके हितों से जुड़े मुद्दों को उठाता है. लेकिन संगठन के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी पत्र प्रसारित करना गंभीर मामला है. इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों की पहचान की जा सके.
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