Ranchi : नई दिल्ली में शुक्रवार को आदिवासी समुदाय की धार्मिक पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर एक अहम बैठक आयोजित की गई. अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद (महाराष्ट्र) और अखिल भारतीय आदिवासी धर्म परिषद के संयुक्त तत्वावधान में हुई इस बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए आदिवासी समाज के प्रमुख नेताओं और प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
बैठक में आदिवासी समुदाय के लिए अलग धर्म कोड लागू करने के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई. सभी प्रतिनिधियों ने इस विषय को गंभीर बताते हुए राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया. साथ ही यह भी तय किया गया कि धर्म कोड की मांग को लेकर व्यापक जनजागरण और संघर्ष अभियान चलाया जाएगा.

बैठक में शामिल आदिवासी समाज के लोग
धर्म कोड लागू कराने की मांग को लेकर 16 मई को महाराष्ट्र के नासिक में राष्ट्रीय आदिवासी धर्म महासम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की गई है. इस सम्मेलन में देशभर के सामाजिक, धार्मिक और आदिवासी समुदाय के अगुवाओं को आमंत्रित किया जाएगा.
बैठक में शामिल प्रेम शाही मुंडा ने कहा कि जनगणना प्रपत्र में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड नहीं है. इससे उनका मौलिक अधिकार छिना जा रहा है. आरोप लगाया कि अब तक धार्मिक न्यास बोर्ड का गठन नहीं किया गया है, ट्राइबल सब प्लान के बजट में कटौती हो रही है और आरक्षण व्यवस्था पर भी लगातार प्रहार हो रहे हैं.
प्रेम शाही मुंडा के अनुसार, धर्म कोड न दिया जाना एक बड़ी राजनीतिक साजिश है. उनका कहना है कि जब तक धर्म कोड लागू नहीं होगा, तब तक आदिवासी समुदाय की सही तरीके से जनगणना नहीं हो पाएगी.

बैठक में अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष लखी भाई जाधव, अखिल भारतीय आदिवासी धर्म परिषद के प्रेम शाही मुंडा, आदिवासी धार्मिक संघर्ष संगठन महाराष्ट्र हंसराज लक्ष्मण खेवडा, तुकाराम सोमा वरडा, निलेश बालकृष्णमहाले, बंसल शंकर गावित , कृष्ण गंगाराम खाडम, झारखंड से आदिवासी जन परिषद प्रकाश मुंडा, छत्तीसगढ़ से भुवन कोराम, महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष पुरुषोत्तम रंधावा सहित कई लोग शामिल हुए.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें


Leave a Comment