कार्यशाला में देशभर के 37 कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएआर संस्थानों के 250 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया. इस अवसर पर नवोन्मेषी कृषि अपनाने और किसानों की आय बढ़ाने में योगदान के लिए चान्हो प्रखंड के चोरेया गांव के नंदकिशोर साहू और रांची के अभिषेक मिश्र को सम्मानित किया गया.

लाल जाट ने वैज्ञानिकों से भारत को मक्का अनुसंधान, विकास, उत्पादन और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए ठोस प्रयास करने का आह्वान किया. उन्होंने इसके लिए मजबूत डेटा इकोसिस्टम, शोध संस्थानों के बीच समन्वय और पब्लिक-प्राइवेट भागीदारी को बढ़ाने पर जोर दिया.
उन्होंने कहा कि आंकड़ों का व्यवस्थित संग्रहण और उनका उपयोग सटीक पूर्वानुमान के लिए होना चाहिए, न कि केवल परिणामों के विश्लेषण के लिए. साथ ही, सीमित पोषक तत्वों के अधिक प्रभावी उपयोग वाले किस्मों के विकास पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई. उन्होंने वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण और वैश्विक exposure पर भी जोर दिया.
आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डीके यादव ने बताया कि देश में मक्का की उत्पादकता 2014-15 में 2567 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 3590 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है. वर्ष 2030-31 तक इसे 4100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है, हालांकि यह अभी भी वैश्विक औसत (6000 किलोग्राम) से कम है. उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में 315 हाइब्रिड किस्में विकसित की गई हैं, जिनमें 113 निजी और 202 सार्वजनिक क्षेत्र की हैं.
बीएयू के कुलपति डॉ. एससी दुबे ने कहा कि झारखंड और बिहार में मक्का उत्पादन बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं. झारखंड में वर्तमान उत्पादकता 2.4 टन प्रति हेक्टेयर है, जो राष्ट्रीय औसत 3.5 टन से कम है. उन्होंने उच्च प्रोटीन युक्त किस्मों, रोग-कीट नियंत्रण के लिए बेहतर क्वारेंटाइन व्यवस्था और बीज उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया.
आईसीएआर के सहायक महानिदेशक (खाद्य एवं चारा फसलें) डॉ. एसके प्रधान ने बताया कि वैश्विक स्तर पर अनाज उत्पादन में मक्का पहले स्थान पर है. नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में मक्का का उत्पादन 1299 मिलियन टन, गेहूं 740 मिलियन टन और चावल 540 मिलियन टन है. उन्होंने वर्षा आधारित क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु अनुकूल किस्मों के विकास की आवश्यकता बताई.भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान, लुधियाना के निदेशक डॉ. एचएस जाट ने स्वागत भाषण में बताया कि देश में उपयोग होने वाले एथनॉल का 40 प्रतिशत हिस्सा मक्का से प्राप्त होता है.
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