Shambhu Kumar
Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम जिला के चाईबासा स्थित सदर अस्पताल में टेंडर प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है. आरोप है कि हर बार की तरह इस बार भी चहेती फर्मों को कार्य आवंटित कर दिया गया, जबकि अन्य योग्य फर्मों को नजरअंदाज कर दिया गया. इस टेंडर प्रक्रिया में कुल 19 फर्मों ने भाग लिया था. इनमें से 14 फर्म तकनीकी रूप से योग्य घोषित की गईं, लेकिन कार्य केवल दो फर्मों को ही आवंटित कर दिया गया. वहीं अन्य 12 योग्य फर्मों को न तो कोई सूचना दी गई और न ही उन्हें कार्य आवंटन प्रक्रिया में शामिल किया गया.
चाईबासा के मेसर्स नीरज कुमार और पलामू के मेसर्स राहुल इंटरप्राइजेज को कार्य आवंटित किया गया. आरोप है कि शिकायत दर्ज होने के बाद आनन-फानन में कार्य आवंटन के तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बाद 9 जुलाई 2026 की शाम 7:30 बजे झारखंड टेंडर पोर्टल पर जानकारी अपडेट की गई, जबकि ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में सभी जानकारियां नियमानुसार समय पर अपडेट की जानी चाहिए.
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बताया जाता है कि जनवरी माह में निविदा संख्या 16/25-26/डब्ल्यूएस के तहत झारखंड टेंडर पोर्टल पर स्प्लिट टेंडर जारी किया गया था. यह कार्य पश्चिमी सिंहभूम जिले के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की ब्रांडिंग, रंगाई-पुताई, पीट निर्माण और अन्य मरम्मत कार्यों से संबंधित था. 21 जनवरी 2026 को तकनीकी बोली खोली गई. लगभग एक माह बाद 24 फरवरी 2026 को योग्य फर्मों की सूची जारी की गई और 26 फरवरी 2026 को वित्तीय बोली खोली गई. इसके बाद प्रक्रिया शांत हो गई.
फिर 26 मार्च 2026 को चुपचाप दो फर्मों - मेसर्स नीरज कुमार (चाईबासा) और मेसर्स राहुल इंटरप्राइजेज (पलामू) को कार्य आवंटित कर दिया गया. टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन थी, लेकिन कार्य आवंटन ऑफलाइन किया गया. इससे अनियमितता की आशंका और गहरा जाती है. झारखंड टेंडर पोर्टल पर कार्य आवंटन की स्थिति 9 जुलाई 2026 को अपडेट की गई, जबकि यह जानकारी नियमानुसार समय पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी.
जिस दिन नए सिविल सर्जन ने पदभार संभाला, उसी दिन हुआ कार्य आवंटन
इस मामले का एक और पहलू सवाल खड़े करता है. वर्तमान सिविल सर्जन डॉ. जुझारू मांझी ने 26 मार्च 2026 को पदभार ग्रहण किया और उसी दिन दोनों फर्मों को कार्य आवंटित करने का आदेश जारी कर दिया गया.
सामान्यतः किसी अधिकारी के पदभार ग्रहण करने के दिन प्रशासनिक और औपचारिक प्रक्रियाओं में काफी समय लगता है. ऐसे में लगभग दो माह से लंबित टेंडर प्रक्रिया का कार्य आवंटन उसी दिन किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं. यह भी संभावना जताई जा रही है कि नए सिविल सर्जन को पूरी प्रक्रिया की जानकारी नहीं रही हो. हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
तकनीकी रूप से योग्य घोषित फर्में
तकनीकी बोली में योग्य घोषित फर्मों में आरुष इंटरप्राइजेज (चाईबासा), अल शीहन प्राइवेट लिमिटेड (चाईबासा), अर्थ इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड (चाईबासा), भारत इंटरप्राइजेज (चाईबासा), इम्पायर (जमशेदपुर), एफएससीई कंसल्टेंट एंड इंजीनियर (रांची), केविलंस कंस्ट्रक्शन वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड (रांची), मेसर्स नीरज कुमार (चाईबासा), मेसर्स राहुल इंटरप्राइजेज (पलामू), मेसर्स वी.के. कॉरपोरेशन (धालभूमगढ़), न्यू गैलेक्सी कॉरपोरेशन (रांची), शौर्य एसोसिएट्स (रांची), श्री कॉरपोरेशन (हजारीबाग) तथा विनसेंट टेडकॉन प्राइवेट लिमिटेड (रांची) शामिल हैं. नियमानुसार कार्य आवंटन इन सभी योग्य फर्मों के बीच प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए था, लेकिन आरोप है कि ऐसा नहीं किया गया.
क्या होता है स्प्लिट टेंडर
स्प्लिट टेंडर उन कार्यों के लिए निकाला जाता है जिनमें कई छोटे-छोटे कार्य शामिल होते हैं. ऐसे मामलों में सामान्यतः किसी एक फर्म को संपूर्ण कार्य नहीं दिया जाता. इस प्रक्रिया में पहले सभी कार्यों के लिए न्यूनतम दर तय की जाती है. इसके बाद तकनीकी रूप से योग्य सभी फर्मों को बैठक के लिए बुलाया जाता है और उनकी सहमति के आधार पर अलग-अलग कार्यों का आवंटन किया जाता है. इच्छुक फर्म अपनी क्षमता और सहमति के अनुसार कार्य ले सकती हैं.
आरोप है कि इस मामले में ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई. योग्य फर्मों को न तो बैठक के लिए बुलाया गया और न ही उन्हें किसी प्रकार की सूचना दी गई. इसके बजाय केवल दो फर्मों को लाखों रुपये के कार्य आवंटित कर दिए गए.
कई स्तरों पर की जा चुकी है शिकायत
कार्य आवंटन में कथित अनियमितता को लेकर कई स्तरों पर शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. टेंडर में तकनीकी रूप से योग्य घोषित फर्म अल शीहन प्राइवेट लिमिटेड ने मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक, पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त और सिविल सर्जन को लिखित शिकायत भेजी है. शिकायत के साथ कई दस्तावेज और तकनीकी बिंदु भी प्रस्तुत किए गए हैं, जिनके आधार पर कार्य आवंटन प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाया गया है.
सिविल सर्जन का पक्ष
इस मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉ.जुझार मांझी से पूछने पर उन्होंने कहा कि मेरे संज्ञान में यह मामला आया है,मैंने इसकी जांच के लिए आदेश दिया है. उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल के दौरान यह टेंडर नहीं हुआ था. पदभार ग्रहण के दिन ही कार्य आवंटन के सवाल पर उन्होंने कहा कि पुनः वे फाइलों को देखेंगे.
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