- विदेशी भाषा शिक्षण में AI, नैतिकता और संस्कृति पर मंथन
Ranchi : BIT, मेसरा के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा “विदेशी भाषा शिक्षण एवं अधिगम में प्रौद्योगिकी, नैतिकता और सांस्कृतिक आयाम” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन आज हाइब्रिड मोड में किया गया. इस सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों से शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली.
उद्घाटन सत्र प्रातः 10 बजे अनुसंधान एवं विकास भवन के सेमिनार हॉल–I में आरंभ हुआ. कार्यक्रम में कार्यवाहक कुलपति डॉ. अशोक शेरोन, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. भास्कर कर्ण, डॉ. धर्मेन्द्र कुमार चंद, सम्मेलन संयोजक डॉ. मृणाल पाठक तथा डॉ. संदीप कुमार बिस्वास मंचासीन रहे. उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि फ्रांस दूतावास, भारत की अधिकारी जूलिया मार्टिन थीं.
मुख्य अतिथि जूलिया मार्टिन को फ्रांस के शिक्षा एवं विदेश मंत्रालय में पंद्रह वर्षों का प्रशासनिक अनुभव प्राप्त है. वे यूनाइटेड किंगडम, जापान और कंबोडिया में भी सेवाएं दे चुकी हैं तथा फ्रेंच भाषा और संस्कृति के वैश्विक प्रसार हेतु सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं.
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन एवं संस्थान प्रार्थना से हुई. इसके पश्चात अतिथियों को स्मृति-चिह्न एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया.
स्वागत भाषण में विभागाध्यक्ष डॉ. भास्कर कर्ण ने प्रौद्योगिकी आधारित भाषा शिक्षा में नैतिकता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के महत्व पर प्रकाश डाला. सम्मेलन संयोजक डॉ. मृणाल पाठक ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर अपने विचार रखते हुए कहा, “एआई एक अद्भुत सेवक है, लेकिन एक विनाशकारी स्वामी.”
कार्यवाहक कुलपति डॉ. अशोक शेरोन ने उच्च शिक्षा में एआई और डिजिटल नवाचार की बढ़ती भूमिका पर बल दिया. उन्होंने संस्थान में मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान तथा डेटा साइंस जैसे नए विभागों की स्थापना को समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया.
मुख्य अतिथि जूलिया मार्टिन-लेग्रोस ने “एआई युग में विदेशी भाषा शिक्षण: अवसर और चुनौतियां” विषय पर मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत किया. उन्होंने एआई की तुलना प्रोमीथियस की मिथक कथा से करते हुए इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं पर गहन चर्चा की, जिससे सम्मेलन की बौद्धिक दिशा निर्धारित हुई.
उद्घाटन सत्र का समापन केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड के सेंटर ऑफ फॉर ईस्ट लैंग्वेजेस के सहायक प्राध्यापक डॉ. संदीप कुमार बिस्वास द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ. इसके बाद सामूहिक छायाचित्र एवं जलपान का आयोजन किया गया.
उद्घाटन समारोह के पश्चात जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रोफेसर प्रो. सुशांत कुमार मिश्रा ने “प्रौद्योगिकी विदेशी भाषा शिक्षण/अधिगम को किस प्रकार नया स्वरूप दे रही है?” विषय पर व्याख्यान दिया. उन्होंने भाषा, स्मृति और विस्मृति के संबंध पर प्रकाश डालते हुए शिक्षक की रचनात्मक भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया.
इसके पश्चात विभिन्न शोध पत्र प्रस्तुतिकरण सत्र आयोजित किए गए, जिनका संचालन प्रो. सुशांत कुमार मिश्रा, डॉ. रोहित कुमार पांडेय और डॉ. अनन्या साहा ने किया. सत्रों में गहन शैक्षणिक चर्चाएं हुईं और प्रतिभागियों को उपयोगी सुझाव प्राप्त हुए. इस प्रकार सम्मेलन के प्रथम दिन का समापन सक्रिय संवाद, विचार-विमर्श और शैक्षणिक सहभागिता के साथ हुआ.
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