Ranchi News : झारखंड में रोजगार को लेकर एक अनोखा ट्रेंड सामने आया है. पश्चिमी सिंहभूम जैसे जनजातीय बहुल क्षेत्रों में काम के भरपूर मौके हैं. वहीं औद्योगिक शहर बोकारो में 8.6 प्रतिशत और धनबाद में 8 प्रतिशत बेरोजगारी दर है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इन औद्योगिक जिलों में बड़े कारखाने और खदान होने के बावजूद रोजगार का भारी संकट है.
श्रम भागीदारी में पिछड़े औद्योगिक जिले
पूरे झारखंड की औसत श्रम भागीदारी दर 59.8 प्रतिशत है. इसके विपरीत धनबाद में यह दर सबसे कम 50.8 प्रतिशत दर्ज हुई है. पूर्वी सिंहभूम में यह 51.2 प्रतिशत और बोकारो में 54.3 प्रतिशत है. काम करने वाली आबादी के मामले में भी ये बड़े औद्योगिक जिले राज्य के औसत से काफी पीछे हैं.
32 प्रतिशत युवा पूरी तरह खाली
धनबाद में 15 से 29 साल के 32 प्रतिशत युवा पूरी तरह खाली बैठे हैं. वे ना तो पढ़ाई कर रहे हैं और ना ही उनके पास कोई काम है. बोकारो में ऐसे युवाओं की संख्या 30 प्रतिशत और पूर्वी सिंहभूम में 28.3 प्रतिशत है. पूरे झारखंड में खाली बैठे युवाओं का औसत केवल 21 प्रतिशत है.
जनजातीय क्षेत्रों की स्थिति बेहतर
औद्योगिक जिलों के मुकाबले राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति बहुत अच्छी है. पश्चिमी सिंहभूम में श्रम भागीदारी सबसे अधिक 68.3 प्रतिशत है. पलामू और हजारीबाग के आंकड़े भी बोकारो-धनबाद से बेहतर हैं.

