Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने SBI (कॉमर्शियल ब्रांच) के अफसर मुरारी प्रसाद बर्णवाल को 10 लाख रुपये जमा करने से छूट देने से इनकार कर दिया है. वह बैंक जालसाजी के मामले में सीबीआई का अभियुक्त है. कोर्ट ने चार महीने में 10 लाख जमा करने की शर्त पर अग्रिम जमानत दी थी. चार साल फरार रहने के बाद उसने पैसा जमा करने की शर्त वापस लेने का अनुरोध करते हुए याचिका दायर की थी.
मुरारी बर्णवाल नवंबर 2003 से मई 2006 तक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के रांची कॉमर्शियल ब्रांच में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर पदस्थापित था. इसके बाद वह जून 2006 से अक्टूबर 2007 तक बोकारो स्थित कॉमर्शियल ब्रांच में पदस्थापित था. उसने अपने कार्यकाल के दौरान विवेक प्रताप सिंह की मेसर्स रेणुकरा पॉलिसैक्स प्राइवेट लिमिटेड को गलत तरीके से कर्ज दिया और उसकी सीमा बढ़ाई.
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जालसाजी में शामिल अधिकारियों ने सरकारी जमीन को गिरवी रखा. जालसाजी के इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद मुरारी ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की. सुनवाई के दौरान उसने कोर्ट में खुद ही यह स्वीकार किया कि वह जमानत के तौर पर 10 लाख रुपये सिविल कोर्ट के रजिस्ट्रार के पास जमा करा देगा. हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए उसे अग्रिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया. कोर्ट ने इसके लिए उसे चार महीने का समय दिया. लेकिन 2021 में दिये गये इस आदेश के आलोक में उसने निर्धारित समय में कोर्ट में सरेंडर नहीं किया.
वर्ष 2022 में उसने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की और पैसा जमा करने के लिए समय बढ़ाने की मांग की. कोर्ट ने उसे और छह महीने का समय दिया. लेकिन उसने ना तो कोर्ट में पैसा जमा किया और ना ही सरेंडर किया. करीब चार साल फरार रहने के बाद उनसे 2026 में हाईकोर्ट में तीसरी याचिका दायर की. उसमें उसने कोर्ट से 10 लाख रुपये सिविल कोर्ट में जमा करने के आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया. कोर्ट ने सुनवाई के बाद उसकी याचिका खारिज कर दी.
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