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अबुआ राज अभी अधूरा है, उसे पूरा करना हमारी जिम्मेदारी : मुकुंद नायक

Ranchi : पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देते हुए नागपुरी कलाकार पद्मश्री मुकुंद नायक भावुक हो गए. उन्होंने संवाददाता से कहा कि झारखंड के आदिवासी-मूलवासी समाज को जो अपूरणीय क्षति हुई है. उसकी भरपाई संभव नहीं है. उन्होंने याद किया कि वर्ष 1973-74 में जब वे स्कूल की पढ़ाई कर रहे थे, तब झारखंड आंदोलन का ज्वलंत  तेज था.

 

उस दौर में झारखंड आंदोलनकारी प्रफुल्ल राय, क्षितिज कुमार और मधु हंसमुख जैसे संस्कृति कर्मियों ने झारखंड राज्य के आंदोलन और सांस्कृतिक संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. आज झारखंड अलग राज्य बन चुका है, लेकिन यहां के मूल निवासियों को उनका हक और अधिकार अब भी नहीं मिला है.

 

दिशोम गुरु शिबू सोरेन आदिवासी समाज 'अबुआ राज' का प्रतीक 

 

मुकुंद नायक ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और आजसू दोनों का अलग राज्य बनाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है. दिशोम गुरु शिबू सोरेन को आदिवासी समाज 'अबुआ राज' का प्रतीक मानता है. वे सभी धर्मों और समुदायों को साथ लेकर चलते थे.

 

उन्होंने समाज में नशामुक्ति अभियान चलाया और प्रकृति से गहरा प्रेम करना सिखाया है. उन्होंने बताया कि दिशोम का अर्थ देश होता है. पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने हमेशा झारखंड को एक आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया.

 

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे ग्रेटर झारखंड के सपने को साकार

 

पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने अलग राज्य के लिए लड़ाई लड़ी, लेकिन जो झारखंड हमें मिला है, वह उनके सपनों का झारखंड नहीं है. ‘अबुआ राज’ की कल्पना अभी अधूरी है. उन्होंने बताया कि 1976 में उनकी मुलाकात पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन से हुई थी. सीएम हेमंत सोरेन अब पूरी तरह परिपक्व हो चुके है. वह ग्रेटर झारखंड के सपने को साकार करेंगे.

 

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