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अंचल कार्यालयों में जमीन से जुड़े भ्रष्टाचार पर ACB का शिकंजा, 25 दिनों में 10 आरोपी गिरफ्तार

Ranchi :  जमीन से जुड़े सरकारी कामकाज में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी की हालिया कार्रवाई में हजारीबाग और रांची से जुड़े कई मामले सामने आए हैं. हजारीबाग जिले के एक अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज के नाम पर 15 हजार रिश्वत लेने के आरोप में राजस्व कर्मचारी सतीश कुमार को गिरफ्तार किया गया.
 
एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) कार्यालय की फाइल फोटो
  • अधिकारियों से बिचौलिये तक जांच के दायरे में

Ranchi :  झारखंड में जमीन से जुड़े मामलों में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) लगातार कार्रवाई कर रही है. अंचल कार्यालयों में दाखिल-खारिज के नाम पर रिश्वतखोरी, जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी, भूमि अधिग्रहण मुआवजे में गड़बड़ी और वन भूमि सहित अन्य मामलों 25 दिनों में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.

 

गिरफ्तार आरोपियों में सरकारी कर्मचारी और जमीन से जुड़े मामलों में कथित तौर पर बिचौलियों की भूमिका निभाने वाले लोग शामिल हैं. एसीबी की जांच का दायरा केवल रिश्वत लेने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन के अवैध कारोबार में कथित रूप से शामिल लोगों तक पहुंच गया है.

 

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दाखिल-खारिज के नाम पर रिश्वत लेने के आरोप में कार्रवाई

जमीन से जुड़े सरकारी कामकाज में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी की हालिया कार्रवाई में हजारीबाग और रांची से जुड़े कई मामले सामने आए हैं. हजारीबाग जिले के एक अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज के नाम पर 15 हजार रिश्वत लेने के आरोप में राजस्व कर्मचारी सतीश कुमार को गिरफ्तार किया गया. 

 

वहीं, रांची जिले के नामकुम अंचल में दाखिल-खारिज से संबंधित दस्तावेज गायब करने के मामले में तत्कालीन अंचल अधिकारी मनोज कुमार और लिपिक दीपक कुमार को गिरफ्तार किया गया. जांच एजेंसी इस मामले में दस्तावेजों की भूमिका, रिकॉर्ड से जुड़ी कथित अनियमितताओं और संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी की पड़ताल कर रही है.

 

इन मामलों से स्पष्ट है कि जमीन से जुड़े सरकारी कामकाज में कथित गड़बड़ियों को लेकर एसीबी की नजर राजस्व कर्मचारियों के साथ-साथ उन अधिकारियों पर भी है, जिनकी भूमिका जांच में सामने आ रही है.

 

मुआवजा भुगतान और वन भूमि के मामलों में भी जांच

जमीन से संबंधित भ्रष्टाचार के मामलों में भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाले मुआवजे की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है. आरोप है कि भुगतान से जुड़ी कथित अनियमितताओं के जरिए सरकारी राशि का अनुचित लाभ लेने की कोशिश की गई. एसीबी संबंधित दस्तावेजों, भुगतान प्रक्रिया और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है. 


वहीं वन भूमि से जुड़े मामलों में सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री और दस्तावेजों में कथित हेराफेरी की शिकायतों पर भी कार्रवाई की गई है. हजारीबाग में वन भूमि से जुड़े कथित घोटाले के मामले में भी कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई. इन मामलों में सरकारी जमीन की कथित अवैध खरीद-बिक्री और संबंधित दस्तावेजों में हेराफेरी के आरोप शामिल हैं. 

 

जांच के दौरान जमीन के वास्तविक स्वामित्व, दस्तावेजों की वैधता और जमीन के लेन-देन में शामिल व्यक्तियों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल की जा रही है. इसका उद्देश्य कथित अनियमितताओं की कड़ियों को जोड़ना और जिम्मेदार लोगों की पहचान करना है.

 

NH-33 चौड़ीकरण के मुआवजे में गड़बड़ी के आरोप

रामगढ़ जिले के मांडू क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-33 (NH-33) के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में कथित अनियमितताओं का मामला भी एसीबी की जांच के दायरे में है. जानकारी के अनुसार, करीब 1.92 एकड़ अधिग्रहित भूमि के मुआवजा भुगतान में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं.

 

इस मामले में तत्कालीन अमीन और भूमि अधिग्रहण कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका पर कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है. जांच एजेंसी मुआवजे के निर्धारण, जमीन के दस्तावेजों और सरकारी राशि के वितरण से संबंधित तथ्यों की जांच कर रही है.

 

जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अनियमितताएं किस स्तर पर हुईं, भुगतान प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही और सरकारी धन के वितरण में नियमों का पालन किया गया या नहीं.

 

 तत्कालीन सीओ डॉ. श्वेता वर्मा के खिलाफ भी जांच

जमीन से जुड़े मामलों में तत्कालीन अंचल अधिकारी डॉ. श्वेता वर्मा के खिलाफ भी एसीबी की जांच जारी है. इसका उद्देश्य संबंधित मामलों में अधिकारियों की भूमिका और कथित अनियमितताओं के बीच संभावित संबंधों का पता लगाना है.

 

जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव, दस्तावेजों की मंजूरी और मुआवजा भुगतान जैसी प्रक्रियाओं में अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में जांच के दौरान यदि किसी उच्चस्तरीय अधिकारी की संलिप्तता के साक्ष्य सामने आते हैं, तो उनकी जवाबदेही भी तय करनी होगी.

 

जमीन के कारोबार में बिचौलियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

जमीन से जुड़े सरकारी काम कराने के लिए आम लोगों को दाखिल-खारिज, रिकॉर्ड में सुधार, मुआवजा भुगतान और अन्य राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. इन प्रक्रियाओं के दौरान बिचौलियों की कथित भूमिका और लोगों से पैसे मांगने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं.

 

आरोप है कि कुछ मामलों में सरकारी काम जल्दी कराने के नाम पर लोगों से रकम मांगी जाती है.  इसके अलावा, कर्मचारियों और बिचौलियों के बीच कथित गठजोड़ के जरिए अनुचित लाभ लिया जाता है.

 

ACB की मौजूदा कार्रवाई में ऐसे लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है, जो जमीन से जुड़े मामलों में संपर्क सूत्र या बिचौलिये के तौर पर काम करते हैं. जांच एजेंसी के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कथित भ्रष्टाचार व्यक्तिगत स्तर पर हुआ या इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका भी रही. 


आगे की जांच पर टिकी नजरें

जमीन के मामलों में लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच एसीबी की कार्रवाई से भ्रष्टाचार में शामिल लोगों पर दबाव बढ़ा है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के दौरान किन अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है और सरकारी जमीन व मुआवजे से जुड़े मामलों में कथित अनियमितताओं पर आगे क्या कार्रवाई होती है.

 

जानें कब कितने लोग हुए गिरफ्तार

15 सितंबर : चतरा सदर अंचल का राजस्व कर्मी सतीश कुमार 

22 सितंबर : रांची नामकुम अंचल का तत्कालीन सीआई मनोज कुमार दीक्षित व लिपिक दीपक कुमार

23 सितंबर : हजारीबाग वन भूमि घोटाले में कुलेश्वर प्रजापति

7 अक्टूबर : हजारीबाग वन भूमि घोटाले में विशेश्वर प्रजापति, शंकर प्रजापति और रामगति गुप्ता

1 अक्टूबर :  रामगढ़ मांडू में एनएच चौड़ीकरण मुआवजा भुगतान गड़बड़ी के आरोप में तत्कालीन अमीन बालेश्वर प्रसाद और भू-अर्जन कार्यालय के प्रधान सहायक प्रवीण कुमार सिन्हा

8 अक्टूबर : चतरा में एसडीएम कार्यालय का प्रधान लिपिक बासुदेव राम गिरफ्तार

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