- शराब घोटाले में ACB का शिकंजा
- होलोग्राम और ट्रैकिंग सिस्टम पर भी सवाल
- विनय चौबे से कनेक्शन पर भी पूछताछ
- एक दिन पहले नेक्सजेन के CEO से हुई थी पूछताछ
- पुराने आरोपियों से फिर होगी पूछताछ
Ranchi: झारखंड के कथित शराब घोटाले की जांच में एसीबी ने अब उस डिजिटल सिस्टम की पड़ताल तेज कर दी है, जिसके जरिए राज्य में शराब के उत्पादन से लेकर बाजार तक पहुंचने की पूरी निगरानी की जाती थी. शुक्रवार को राज्य बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के आईटी मैनेजर अमर कुमार को एसीबी ने पूछताछ के लिए बुलाया. उनसे कई घंटे तक शराब की ट्रैकिंग, ट्रेसिंग और होलोग्राम व्यवस्था को लेकर सवाल किए गए.
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एसीबी ने अमर कुमार से पूछा कि JSBCL में लागू डिजिटल ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम में शराब की पूरी जानकारी दर्ज होती थी. किस यूनिट में शराब तैयार हुई, किस ब्रांड की है, कितनी मात्रा में भेजी गई, किस जगह भेजी गई और उस पर कौन सा लेबल लगा है. जब सिस्टम में पूरी जानकारी उपलब्ध थी, तो कथित तौर पर गलत ब्रांड की शराब बाजार तक कैसे पहुंची. इसकी जानकारी उन्हें थी या नहीं. अगर जानकारी थी तो इसकी सूचना किस अधिकारी को दी गई.
पूछताछ के दौरान एसीबी ने शराब की बोतलों पर लगाए जाने वाले होलोग्राम की प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में रखा. अधिकारियों ने पूछा कि होलोग्राम तैयार करने और लगाने की प्रक्रिया क्या थी. इससे शराब की ट्रैकिंग किस तरह होती थी और पूरे सिस्टम की मॉनिटरिंग किस स्तर से की जाती थी.
अमर कुमार से यह भी पूछा गया कि ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम की निगरानी कौन करता था और इसमें उनकी भूमिका क्या थी. पूछताछ में उन्होंने कुछ जानकारियां दीं, लेकिन कई सवालों का स्पष्ट जवाब देने के लिए उन्होंने एसीबी से अतिरिक्त समय मांगा. एसीबी ने उनकी मांग स्वीकार कर ली है.
एसीबी ने एक बार फिर तत्कालीन उत्पाद सचिव आईएएस विनय चौबे और शराब कारोबार से जुड़े लोगों के बीच कथित संबंधों को लेकर अमर कुमार से जानकारी ली. इसके अलावा मैनपावर कंपनियों के चयन की प्रक्रिया, होलोग्राम तैयार करने वाली कंपनी के चयन, विधु गुप्ता के संपर्कों और ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम की मॉनिटरिंग को लेकर भी सवाल किए गए.
इससे एक दिन पहले गुरुवार को नेक्सजेन के सीईओ अरुण कुमार सिंह भी एसीबी के सामने पेश हुए थे. उनसे शराब कारोबार और कथित अनियमितताओं से जुड़े कई बिंदुओं पर पूछताछ की गई थी.
वहीं समन जारी होने के बावजूद छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड के पूर्व प्रबंध निदेशक सह आबकारी विभाग के विशेष सचिव अरुण पति त्रिपाठी और मैनपावर एजेंसी मेसर्स विजन हॉस्पिटालिटी के प्रतिनिधि श्यामजी शरण एसीबी के समक्ष उपस्थित नहीं हुए.
जांच एजेंसी के अनुसार पूरे मामले में राज्य को करीब 38 करोड़ रुपये के कथित नुकसान की बात सामने आई है. आरोप है कि तत्कालीन उत्पाद सचिव और अन्य लोगों की मिलीभगत से फर्जी बैंक गारंटी के बावजूद मैनपावर कंपनी को शराब बिक्री का ठेका दिया गया. वर्ष 2022 में शराब नीति में अचानक बदलाव किए जाने और विधु गुप्ता की प्रिज्म कंपनी को होलोग्राम का ठेका तथा उसकी मॉनिटरिंग से जुड़ी शक्तियां दिए जाने की भी जांच हो रही है.
एसीबी इस बात की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है कि नीति में बदलाव से लेकर मैनपावर एजेंसी और होलोग्राम कंपनी के चयन तक फैसले किस स्तर पर लिए गए और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी.
इस मामले में एसीबी पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. हालांकि समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण कई आरोपियों को अदालत से जमानत मिल गई थी. अब जांच एजेंसी पुराने आरोपियों और मामले से जुड़े अधिकारियों को दोबारा बुलाकर पूछताछ कर रही है.
एसीबी की पूछताछ का यह सिलसिला 10 अगस्त तक जारी रहने की संभावना है. आने वाले दिनों में कई और लोगों से पूछताछ हो सकती है. एजेंसी का फोकस अब शराब की बिक्री व्यवस्था, डिजिटल ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम, होलोग्राम, मैनपावर एजेंसी और कथित नीति बदलाव के बीच की पूरी कड़ी जोड़ने पर है.
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