Ranchi News: नामकुम अंचल में जमीन के रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ और डबल म्यूटेशन के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जांच तेज कर दी है. हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज FIR के सिलसिले में ACB की टीम नामकुम अंचल कार्यालय पहुंची और जमीन से संबंधित रोकड़ रुम की जांच की. जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण कागजात मिले हैं.
ACB की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन का डबल म्यूटेशन किस आधार पर किया गया. संबंधित पंजी और अंचल कार्यालय के अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है. जांच एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि रिकॉर्ड में कथित बदलाव किस स्तर पर और किन अधिकारियों की भूमिका से हुआ.
मामले में तत्कालीन CO श्वेता वर्मा, तत्कालीन अंचल निरीक्षक मनोज कुमार और तत्कालीन अंचल निरीक्षक दीपक कुमार को आरोपी बनाया गया है. ACB ने इस संबंध में केस नंबर 18/26 दर्ज किया है. जांच एजेंसी लगातार तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ करने के साथ मामले से जुड़े दस्तावेज जुटा रही है.
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तत्कालीन CO श्वेता वर्मा से पूछताछ की तैयारी
जांच के दौरान ACB तत्कालीन CO श्वेता वर्मा की भूमिका भी खंगाल रही है. उनसे पूछताछ के लिए टीम लगातार प्रयास कर रही है. हालांकि उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ बताया जा रहा है और वह फिलहाल अपने ठिकाने पर नहीं मिली हैं. ACB उनकी तलाश में संभावित ठिकानों की जानकारी जुटा रही है.
1.22 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप
मामला धुर्वा थाना क्षेत्र के डुंडू गांव स्थित खाता नंबर 32 के प्लॉट नंबर 776, 820, 821 और 822 से जुड़ा है. इन जमीनों के रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ कर प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम जमाबंदी कायम करने का आरोप है. शिकायत में करीब 1.22 एकड़ जमीन के म्यूटेशन और डिमांड खोलने में भी अनियमितता का आरोप लगाया गया है.
शिकायत के अनुसार, परिवादी की मां ने अलग-अलग पंजीकृत विक्रय विलेखों के जरिए कुल 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी. बाद में उनकी मृत्यु के बाद परिवार में बंटवारा हुआ और परिवादी ने खुद को जमीन का वैध उत्तराधिकारी बताया.
डबल जमाबंदी का नोटिस मिलने के बाद सामने आया विवाद
परिवादी के अनुसार, 17 अगस्त 2016 को उन्हें अंचल कार्यालय से डबल जमाबंदी को लेकर नोटिस मिला. इसके बाद जब उन्होंने अंचल कार्यालय में जानकारी ली तो संबंधित जमीन के एक हिस्से पर प्रथम प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम से नई जमाबंदी कायम किए जाने की जानकारी मिली.
मामला आगे राजस्व अधिकारियों के समक्ष पहुंचा और बाद में न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई. हाईकोर्ट के आदेश के बाद ACB ने पूरे मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है.
कंपनी निदेशक ने आरोपों से किया इनकार
इधर प्रथम प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक चंद्रप्रकाश धेलिया ने जमीन में किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि कंपनी ने वर्ष 2009 में जमीन खरीदी थी और जमीन की खरीद वैध दस्तावेजों के आधार पर की गई थी.
उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में जमीन की बाउंड्री कराई गई और इसके बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की गई. उनके अनुसार, वर्ष 2011-12 में म्यूटेशन कराया गया और बाद में ऑनलाइन लगान भी जमा किया गया, जो वर्ष 2021 तक चलता रहा.
चंद्रप्रकाश धेलिया के मुताबिक, कोरोना काल के दौरान विपक्षी पक्ष की ओर से एलआरडीसी के यहां मामला दाखिल किया गया था. उनका दावा है कि नोटिस नहीं मिलने के कारण वहां से म्यूटेशन रद्द कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने डीसी कोर्ट में अपील की, जहां सुनवाई के बाद म्यूटेशन कायम रखने का आदेश दिया गया. उन्होंने कहा कि जमीन को लेकर मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और कंपनी ACB की जांच में पूरा सहयोग करेगी.
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