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PMLA और मानव तस्करी की आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

Ranchi: सुप्रीम कोर्ट ने महिला आरोपी पिंकी बसु मुखर्जी को जमानत दे दी है. कोर्ट ने कहा कि आरोपी एक महिला है और उसकी एक नाबालिग बेटी है, वह लगभग 1 साल 4 महीने से जेल में है, मामले में 5 गवाहों की गवाही हो चुकी है. इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने जमानत देना उचित माना. दरअसल  यह मामला Prevention of Money-laundering Act, 2002 (PMLA) के तहत दर्ज है,
 
  • अवैध रूप से बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में प्रवेश, ठहरने और सिम कार्ड उपलब्ध कराने में मदद का आरोप 
  • मोबाइल चैट से मानव तस्करी और वेश्यावृत्ति से जुड़े साक्ष्य मिले 
  • 1 साल 4 महीने से जेल में थी आरोपी महिला 

Ranchi: सुप्रीम कोर्ट ने महिला आरोपी पिंकी बसु मुखर्जी को जमानत दे दी है. कोर्ट ने कहा कि आरोपी एक महिला है और उसकी एक नाबालिग बेटी है, वह लगभग 1 साल 4 महीने से जेल में है, मामले में 5 गवाहों की गवाही हो चुकी है. इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने जमानत देना उचित माना.
दरअसल  यह मामला Prevention of Money-laundering Act, 2002 (PMLA) के तहत दर्ज है, जिसमें धारा 3 और 4 (मनी लॉन्ड्रिंग अपराध) लागू हैं. साथ ही Indian Penal Code की धाराएं 420, 467, 468, 471, 34 भी लगी हैं.


इसके अलावा Passport Act, 1967 और Foreigners Act, 1946 के प्रावधान भी शामिल हैं. बता दें कि यह केस रांची के बरियातू थाना में केस संख्या (188 / 2024) 4 जून 2024 को दर्ज FIR से जुड़ा हुआ है, जिसके आधार पर ईडी ने इसीआईआर 6/ 2024 दर्ज किया था.

 

क्या है मामला

 

प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मामले के अनुसार, बांग्लादेश की एक युवती को अवैध रूप से सीमा पार कर भारत लाया गया. उसे नौकरी दिलाने के बहाने पहले कोलकाता और फिर रांची लाया गया, जहां उसे अन्य लड़कियों के साथ रखा गया और वेश्यावृत्ति में धकेलने की साजिश थी.


3 जून 2024 को पीड़िता किसी तरह वहां से भागकर पुलिस के पास पहुंची और शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद पुलिस ने छापेमारी कर कई लड़कियों को बरामद किया जांच में सामने आया कि आरोपियों के मोबाइल नंबर पिंकी बसु मुखर्जी के नाम पर रजिस्टर्ड थे. कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से बांग्लादेशी नंबरों से लगातार संपर्क का खुलासा हुआ.


आरोप है कि पिंकी बसु मुखर्जी अवैध रूप से बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में प्रवेश, ठहरने और सिम कार्ड उपलब्ध कराने में मदद करती थी, उनके ठिकाने से एक बांग्लादेशी नागरिक भी मिला, जो अवैध रूप से भारत में रह रहा था. मोबाइल चैट से मानव तस्करी और वेश्यावृत्ति से जुड़े साक्ष्य मिले. 

 

हाईकोर्ट ने खारिज की थी जमानत याचिका  


हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की कोर्ट ने पिंकी बसु मुखर्जी की जमानत याचिका 10 सितंबर 2025 को खारिज कर दी थी. कोर्ट ने कहा था कि आरोप बेहद गंभीर हैं, यह एक सुनियोजित और संगठित अपराध (organized crime) है. मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत जमानत के लिए कड़े प्रावधान (Section 45) लागू होते हैं. अदालत ने माना कि अपराध से अर्जित धन (proceeds of crime) का मामला prima facie बनता है. आरोपी जमानत के लिए आवश्यक शर्तें पूरी नहीं कर पाई.

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