Garhwa News: रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को गाली देने, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के मामले में कोर्ट निर्धारित तिथि पर फैसला नहीं सुना सका. क्योंकि आरोपी वकील सहित अन्य अभियुक्त फैसले के लिए निर्धारित तिथि पर कोर्ट में हाजिर ही नहीं हुए. मामला गढ़वा जिले के मझियांव पंचायत के मुखिया चुनाव से संबंधित है.
भवनाथपुर के तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी सह रिटर्निंग ऑफिसर शशिभूषण वर्मा ने नगर उंटारी थाने में एक प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. 12 दिसंबर 2015 को दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में यह आरोप लगाया गया था कि वोटों की गिनती के दिन करीब तीन बजे चंदा देवी अपने पति अंगेश पासवान और 8-10 समर्थकों के साथ पहुंची. चंदा देवी भी मुखिया प्रत्याशी थी. मझियांव पंचायत में रंभा देवी को चंदा देनी से ज्यादा वोट मिले थे. नाराज चंदा देवी ने रिटर्निंग ऑफिसर को मुकदमे में फंसाने की धमकी दी, गाली गलौज की. इससे वोटों की गिनती प्रभावित हुई.
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रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी (303/2015) की जांच के बाद पुलिस ने आरोप पत्र दायर किया. मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राजश्री अपर्णा कुजूर की अदालत ने नौ अक्तूबर 2026 को फैसला सुनाने की तिथि निर्धारित की. फैसले के दिन सभी अभियुक्तों को कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया. लेकिन फैसले की निर्धारित तिथि पर कोई अभियुक्त कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ.
अभियुक्तों के अनुपस्थित होने की वजह से कोर्ट ने फैसला नहीं सुनाया. साथ ही फैसला सुनाने के लिए 27 नवंबर की तिथि निर्धारित की. कोर्ट ने निर्धारित तिथि पर अभियुक्तों को सरेंडर करने का निर्देश दिया. उल्लेखनीय है कि अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राजश्री अपर्णा कुजूर की अदालत ने 30 सितंबर 2026 को चंदा देवी, उसके पति सहित अन्य को दहेज प्रताड़ना के आरोप में दो-दो साल की सजा सुनायी. साथ ही पांच-पांच हजार का दंड लगाया.
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