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मादक पदार्थों की तस्करी के आरोपी को HC से नहीं मिली राहत, याचिका खारिज

झारखंड हाईकोर्ट ने मादक पदार्थों की तस्करी के आरोपी तौफीक अंसारी उर्फ अफरोज उर्फ प्रकाश की याचिका खारिज कर दी है. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायमूर्ति एके राय की कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा जारी निरोधात्मक हिरासत (डिटेंशन) आदेश को सही ठहराते हुए उसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया.
 
  • केंद्र सरकार द्वारा जारी डिटेंशन आदेश को सही ठहराया

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने मादक पदार्थों की तस्करी के आरोपी तौफीक अंसारी उर्फ अफरोज उर्फ प्रकाश की याचिका खारिज कर दी है. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायमूर्ति एके राय की कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा जारी निरोधात्मक हिरासत (डिटेंशन) आदेश को सही ठहराते हुए उसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया.

 

खंडपीठ ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ मादक पदार्थ तस्करी के तीन मामले दर्ज हैं. इन मामलों में क्रमशः लगभग 90 किलो, 144.35 किलो और 206 किलो गांजा बरामद होने का उल्लेख है.
 

बार-बार मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त 

खंडपीठ ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि आरोपी बार-बार मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त रहा है और उसकी गतिविधियां समाज के लिए गंभीर खतरा हैं. खंडपीठ ने यह भी कहा कि उक्त आदेश पारित करते समय प्राधिकरण ने आरोपी के पिछले आचरण और उपलब्ध सामग्री पर विचार किया है तथा उसके खिलाफ “जीवंत और निकट संबंध” (live and proximate link) पाया गया है.

 

खंडपीठ ने कहा कि डिटेंशन आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है. इसलिए 14 अगस्त 2025 का डिटेंशन आदेश और 12 दिसंबर 2025 का पुष्टि आदेश दोनों बरकरार रखे जाते हैं.

 

क्या है मामला 

याचिकाकर्ता तौफीक अंसारी, लोहरदगा जिले का निवासी है. केंद्र सरकार के राजस्व विभाग (PITNDPS यूनिट) ने 14 अगस्त 2025 को Prevention of Illicit Traffic in Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1988 की धारा 3(1) के तहत उसे भविष्य में मादक पदार्थों की अवैध तस्करी रोकने के उद्देश्य से निरुद्ध करने का आदेश दिया था.

 

इसके तहत उसे हजारीबाग स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारागार में रखा गया. हालांकि बाद में 12 दिसंबर 2025 को एक और आदेश जारी कर उसकी हिरासत को गिरफ्तारी की तारीख 26 सितंबर 2025 से एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया. जिसे याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

 

याचिकाकर्ता की दलील 

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी थी कि गिरफ्तारी के बाद कानून के अनुसार निर्धारित समय सीमा में डिटेंशन आदेश और उसके आधार (ग्राउंड्स ऑफ डिटेंशन) उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे उसका संवैधानिक अधिकार प्रभावित हुआ.

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