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झारखंड में बालू, गिट्टी और मिट्टी के अवैध परिवहन पर लगेगा 10 गुना ज्यादा जुर्माना, अधिसूचना जारी

Ranchi News: ईंट, मिट्टी निकालने वाले या ईंट भट्ठा मालिक निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्वामित्व शुल्क की समेकित राशि का पूरा भुगतान कर अनुज्ञापत्र प्राप्त करने में असफल रहते हैं, तो उन्हें ईंट-मिट्टी पर निर्धारित स्वामित्व शुल्क की दर से 10 गुना जुर्माना देना होगा.
 
सांकेतिक तस्वीर

Ranchi News: झारखंड में अवैध खनन और बिना वैध चालान के लघु खनिजों के इस्तेमाल पर शिकंजा कसने की तैयारी है. राज्य सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग ने झारखंड लघु खनिज समनुदान नियमावली, 2004 में संशोधन करते हुए ईंट,मिट्टी के अवैध उत्खनन और सरकारी विकास कार्यों में अवैध खनिजों के उपयोग को लेकर जुर्माने का प्रावधान किया है. विभाग की ओर से 27 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, संशोधित नियम झारखंड राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होंगे.

 

अवैध ईंट-मिट्टी खनन पर 10 गुना जुर्माना

बिना वैध पट्टा, अनुज्ञप्ति या अनुमति के ईंट-मिट्टी का उत्खनन, निकासी, भंडारण अथवा परिवहन करने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है. यदि ईंट-मिट्टी निकालने वाले या ईंट-भट्ठा मालिक निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्वामित्व शुल्क की समेकित राशि का पूरा भुगतान कर अनुज्ञापत्र प्राप्त करने में असफल रहते हैं, तो उन्हें ईंट-मिट्टी पर निर्धारित स्वामित्व शुल्क की दर से 10 गुना जुर्माना देना होगा.

 

इस प्रावधान का उद्देश्य अवैध खनन पर रोक लगाने के साथ सरकारी राजस्व की वसूली सुनिश्चित करना है. बिना वैध अनुमति के खनिज निकालने और उसका कारोबार करने वालों को अब आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है.

 

सरकारी निर्माण कार्यों में वैध चालान अनिवार्य

नियमावली में नया नियम-55 जोड़कर सरकारी विकास कार्यों में इस्तेमाल होने वाले लघु खनिजों की खरीद और आपूर्ति को लेकर भी जिम्मेदारी तय की गई है. इसके तहत सभी संबंधित कार्य विभागों, संवेदकों, ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को सुनिश्चित करना होगा कि निर्माण कार्यों में इस्तेमाल किया गया बालू, पत्थर, गिट्टी या अन्य लघु खनिज वैध खनन पट्टाधारकों अथवा अनुज्ञप्तिधारकों से खरीदा गया हो और उसके लिए वैध चालान उपलब्ध हो.

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नियमों का पालन नहीं करने पर संबंधित पक्ष को इस्तेमाल या आपूर्ति किए गए खनिज का मूल्य जमा करने के साथ स्वामित्व शुल्क की दोगुनी राशि जुर्माने के रूप में देनी होगी. इसके अतिरिक्त जिला खनिज फाउंडेशन (DMF), प्रबंधन शुल्क और पर्यावरणीय उपकर जैसे लागू मदों की समतुल्य राशि भी खनन शीर्ष में जुर्माने के रूप में जमा करने का प्रावधान किया गया है.

 

ठेकेदारों और विभागों की बढ़ेगी जवाबदेही

नए प्रावधान से सरकारी योजनाओं के तहत सड़क, भवन और अन्य निर्माण कार्यों में खनिजों की खरीद की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाएगी. ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को खनिज के स्रोत तथा वैध चालान का रिकॉर्ड रखना होगा. इससे अवैध खनन से निकाले गए खनिजों की आपूर्ति पर अंकुश लगाने और राजस्व संबंधी अनियमितताओं को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है.

 

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