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हाईकोर्ट का अल्टीमेटम : साइबर मामलों की सुनवाई एक महीने में करें शुरू

  • Adjudicating Officer की व्यवस्था को करें सक्रिय
  • साइबर अपराध व ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों की सुनवाई बिना बाधा शुरू करें

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नियुक्त निर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) को एक महीने के भीतर साइबर और ऑनलाइन फ्रॉड से संबंधित शिकायतों की प्राप्ति और सुनवाई की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है. 

 

खंडपीठ ने राज्य सरकार को यह भी कहा है कि कि इन मामलों की सुनवाई बिना बाधा शुरू हो सके, इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) की धारा 46 के तहत नियुक्त Adjudicating Officer (निर्णायक अधिकारी) की व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय किया जाए.

 

यह आदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस  एम. एस. सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मनोज कुमार सिंह की जनहित याचिका में पारित किया.

 

हाईकोर्ट का राज्य सरकार को दिशा-निर्देश

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आदेश दिया है कि 15 दिनों के भीतर सरकार इस सुविधा का व्यापक प्रचार-प्रसार करे, ताकि आम लोग आई.टी. एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया से अवगत हो सकें. यह प्रचार स्थानीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के समाचार पत्रों सहित अन्य माध्यमों से किया जाए. 

 

छह महीने के भीतर सरकार और निर्णायक अधिकारी  स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करें, जो आई.टी. एक्ट और नियमों के अनुरूप हो. इस SOP को भी व्यापक रूप से सार्वजनिक किया जाए. सरकार को यह भी सुझाव दिया है कि वह वर्कशॉप और जागरूकता अभियान आयोजित करे, ताकि छात्र, वरिष्ठ नागरिक और आम लोग साइबर अपराध से बचाव और कानूनी उपायों की जानकारी प्राप्त कर सकें.

 

खंडपीठ ने निर्देश दिया कि निर्णायक अधिकारी 30 अक्टूबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल करें. कोर्ट ने इन निर्देशों के साथ मनोज कुमार सिंह की जनहित याचिका को निष्पादित कर दिया.

 

पूजा सिंघल को नियुक्त किया गया है Adjudicating Officer

 केंद्र सरकार ने वर्ष 2003 में ही सभी राज्यों के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव को IT Act के तहत Adjudicating Officer नियुक्त करने को कहा था. झारखंड सरकार ने भी 2 सितंबर 2025 को अधिसूचना जारी कर पूजा सिंघल को सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग का सचिव नियुक्त किया है. ऐसे में अब शिकायतों की सुनवाई शुरू न करने का कोई औचित्य नहीं है.

 

ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था विकसित करें 

खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार और निर्णय अधिकारी मिलकर जल्द ऐसी व्यवस्था विकसित करें, जिससे ऑनलाइन शिकायतें स्वीकार की जा सकें. खंडपीठ ने माना कि साइबर अपराध पीड़ितों के लिए यह जरूरी है कि शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया आसान और डिजिटल हो. 

 

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि शिकायतें पहले से ही ईमेल it-secretary@jharkhandmail.gov.in पर भेजी जा सकती है या डाक से भेजी जा सकती है या व्यक्तिगत रूप से कार्यालय में दी जा सकती है. खंडपीठ ने कहा कि इस व्यवस्था का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि साइबर फ्रॉड के शिकार लोगों को पता चल सके कि वे IT Act के तहत राहत पाने के लिए कहाँ शिकायत करें.

 

क्या कहा है याचिकाकर्ता ने 

याचिकाकर्ता मनोज कुमार सिंह ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि झारखंड में IT Act की धारा 46 के तहत शिकायतों के निपटारे की कानूनी व्यवस्था होने के बावजूद यह व्यवस्था वर्षों से प्रभावी नहीं है. झारखंड में न तो स्पष्ट प्रक्रिया है और न ही शिकायतों की सुनवाई हो रही है.

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