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आदित्यपुर : सिंहभूम लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र पर सबकी नजर, सीएम की प्रतिष्ठा दांव पर

  • भाजपा से गीता और झामुमो से मैदान में हैं जोबा
  • शनिवार और रविवार को जोबा करेंगी कांड्रा गम्हरिया और आदित्यपुर में जनसंपर्क
Adityapur (Sanjeev Mehta)सिंहभूम लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र पर पूरे प्रदेश की नजर है. यहां मुख्यमंत्री चम्पई सोरेन की प्रतिष्ठा दांव पर है. भाजपा से वर्तमान सांसद गीता कोड़ा मैदान में हैं. वे 2019 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर लड़ी थीं और भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मण गिलुआ को हरा कर जीत दर्याज की थी. इस बार चुनाव में उन्हें कड़ी टक्कर मिल रही है झामुमो की प्रत्याशी जोबा मांझी से, जो वर्तमान में मनोहरपुर की विधायक हैं. रविवार को जोबा मांझी कांड्रा, गम्हरिया और आदित्यपुर में जनसंपर्क कर रही हैं. इसे भी पढ़ें : रिपोर्टः">https://lagatar.in/report-jharkhand-bihar-chhattisgarh-bengal-and-mp-are-the-poorest-states-in-the-country/">रिपोर्टः

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alt="" width="600" height="400" /> भाजपा प्रत्याशी गीता कोड़ा.[/caption] बता दें कि इस सीट पर पहली बार दो महिला उम्मीदवार आमने-सामने हैं. सिंहभूम के इतिहास में पहली बार मुख्य मुकाबले में महिला उम्मीदवार हैं. भाजपा की गीता कोड़ा और झामुमो की जोबा मांझी के बीच कांटे का मुकाबला माना जा रहा है. यहां 13 मई को वोट डाले जाएंगे. हेमंत सोरेन सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री रह चुकी जोबा मांझी पर इंडिया गठबंधन ने भरोसा जताया है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सामाजिक ताने-बाने में झामुमो की जमीनी पकड़ भाजपा से बेहतर नजर आती है. इस कारण ही चाईबासा की सभी छह विधानसभा सीटों पर झामुमो-कांग्रेस का एकतरफा कब्जा है. हालांकि विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव का वोटिंग पैटर्न अलग होता है. इसे भी पढ़ें : मिट्टी">https://lagatar.in/punishment-begins-on-those-doing-illegal-soil-mining-mining-task-force-activated/">मिट्टी

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alt="" width="600" height="400" /> झामुमो प्रत्याशी जोबा माझी.[/caption] सिंहभूम लोकसभा सीट पर 2019 की मोदी लहर में भी कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में गीता कोड़ा ने जीत का परचम लहराया था. पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा ने इस बार कांग्रेस छोड़ कमल का दामन थाम लिया है. भाजपा ने गीता कोड़ा को ही सिंहभूम से टिकट देकर चुनाव में उतार दिया है. गीता हो जनजाति से आती हैं. सिंहभूम लोकसभा सीट हो बहुल है. लोकसभा क्षेत्र में करीब 56 प्रतिशत आबादी हो जनजातियों की है. इसके बाद पिछड़ा वर्ग में कुर्मी-महतो के बाद संथालों की अच्छी खासी आबादी है. स्थानीय जानकारों का दावा है कि जगन्नाथपुर विधानसभा में निश्चित रूप से मधु कोड़ा की पकड़ मजबूत है, लेकिन उनके सामने इस संभावित लीड को सरायकेला, चाईबासा, मझगांव, मनोहरपुर और चक्रधरपुर विधानसभा में बनाये रखना बड़ी चुनौती होगी. इसे भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-baghmaras-kajal-sacrificed-to-dowry-demons-for-bullet/">धनबाद

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गीता कोड़ा की उम्मीदवारी के सहारे इस बार वहां कमल खिलाने का ख्वाब भाजपा का है. गीता कोड़ा की जीत में झामुमो की सियासी जमीन का कितना बड़ा योगदान था, यह भी एक बड़ा सवाल है. इस हालात में देखना दिलचस्प होगा कि झामुमो की इस ताकत के बगैर गीता कोड़ा कितना दम-खम दिखला पाती हैं. सिंहभूम लोकसभा सीट से 1991 में झामुमो के कृष्णा मार्डी ने संथाल होते हुए भी हो बहुल लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीता था. इसके बाद हुए चुनाव में झामुमो लोकसभा सीट नहीं जीत सकी. पिछले दो दशकों से चुनाव में गठबंधन की राजनीति में सिंहभूम सीट सहयोगी दलों के खाते में चले जाने की वजह से झामुमो लोकसभा सीट पर उम्मीदवार खड़ी नहीं कर पाती थी. वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में सिंहभूम लोकसभा की सभी छह विधानसभा सीटें इंडिया गठबंधन ने जीत ली थी. इसे भी पढ़ें : हॉर्लिक्स-बॉर्नवीटा">https://lagatar.in/horlicks-bournvita-has-too-much-sugar-spices-are-carcinogenic-sellers-dont-even-know/">हॉर्लिक्स-बॉर्नवीटा

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झामुमो के कब्जे में पांच सीटें सरायकेला, चाईबासा, मझगांव, मनोहरपुर और चक्रधरपुर हैं. जगन्नाथपुर सीट कांग्रेस के कब्जे में है. भाजपा गठबंधन के पास विधानसभा की सीटें नहीं है. संयुक्त बिहार और झारखंड सरकार में कई बार मंत्री रह चुकीं जोबा मांझी वर्ष 1995 से लेकर 2019 तक के विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक बार 2009 में ही हारी हैं. वर्ष 1995, 2000, 2005, 2014 और 2019 में वह मनोहरपुर विधानसभा से लगातार चुनाव जीतती रही हैं. [wpse_comments_template]

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