प्रोफेशनल कॉलेज में माई प्रोजेक्ट पर कार्यशाला, सुमित कुमार ठाकुर के प्रोजेक्ट को मिला पहला स्थान
संघर्ष से मिला मुकाम
कुश एक आंख से दृष्टिहीन हैं, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दी. इन्हें संगीत विरासत में मिला था. लिहाजा घर में ही दादा और पिता के साथ कठिन साधना की. बतौर कुश संगीत से मन औऱ तन स्वस्थ होते हैं. इससे जीवन में खुशहाली आती है. लिहाजा स्वस्थ रहने के लिए लोगों को संगीत से जुड़ना चाहिए. इसे भी पढ़ें :प्रमोशन">https://lagatar.in/promotion-got-posting-no-4-read-the-pain-of-ias-officers-i-feel-like-leaving-the-job/">प्रमोशनमिला पदस्थापन नहीं-4 : पढ़िए आईएएस अधिकारियों का दर्द, मन करता है नौकरी छोड़ दूं…
रांची में दे रहे संगीत की शिक्षा
कला के उस्ताद कुश को झारखंड सरकार के युवा खेल संस्कृति विभाग ने अनुबंध पर रखा है, जहां सैकड़ों युवाओं को बांसुरी और शहनाई वादन की शिक्षा दे रहे हैं. कुश स्वर्गीय रामदयाल मुंडा कला भवन रांची में भी कला के शौकीन बच्चों को बांसुरी और शहनाई वादन की बारिकियां सिखा रहे हैं. इतना ही नहीं सरायकेला के केदार आर्ट सेंटर से जुड़कर कुश आसपास के छऊ अखाड़े के कलाकारों को संगीत की शिक्षा दे रहे हैं. इसे भी पढ़ें :जेएनयू">https://lagatar.in/stones-pelted-during-screening-of-bbcs-banned-documentary-in-jnu-power-cut-for-several-hours/">जेएनयूमें बीबीसी की बैन डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के दौरान पथराव, कई घंटे बिजली गुल
कसक जो दिल में है
झारखंड और भारत सरकार से उचित सम्मान पाने की लालसा कुश के दिल में है. कुश कहते हैं मेरे दादा और पिता राजघराने से जुड़े रहे और एक कलाकार के रूप में सम्मान पाया लेकिन मुझे विदेश में तो कई सम्मान मिले लेकिन अपने राज्य और देश में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा हूं. इसे भी पढ़ें :डेढ़">https://lagatar.in/kangana-ranauts-twitter-account-restored-after-a-year-and-a-half-expressed-happiness-by-tweeting/">डेढ़साल बाद कंगना रनौत का ट्विटर अकाउंट बहाल, ट्वीट कर जाहिर की खुशी
ताकि कला जिंदा रहे
[caption id="attachment_536534" align="aligncenter" width="279"]alt="" width="279" height="300" /> अंतरराष्ट्रीय शहनाई और बांसुरी वादक कुश कुमार कारवा की फोटो.[/caption] संगीत के प्रति आज के युवाओं में निराशा का भाव देखता हूं. युवा इसमें सुनहरा भविष्य नहीं देख पा रहे हैं. वे इंजीनियर और डॉक्टर बनना चाहते हैं, कलाकार नहीं. देश के हुक्मरानों से मेरी गुजारिश है कि कला और कलाकार को सम्मान दें, ताकि भारतीय कला और संस्कृति जिंदा रह सके. इसे भी पढ़ें :वैशाली">https://lagatar.in/heavy-protest-against-tejashwi-yadav-in-vaishali-people-lying-in-front-of-the-car/">वैशाली
में तेजस्वी यादव का भारी विरोध, गाड़ी के आगे लेटे लोग, सुनायी खरी- खोटी
अंतरराष्ट्रीय बांसुरी सह शहनाई वादक में इन संस्थाओं ने किया है सम्मानित -
1993 में मुंबई छाया फ़िल्म एकेडमी. 1996 में बांग्लादेश - उत्सव इंडिया सम्मेलन. 1997 में सरायकेला पद्मश्री सुधेन्द्र नारायण सिंहदेव द्वारा क्लापीठ छऊ कला केंद्र अवार्ड. 1998 में बिहार सरकार की कला संस्कृति खेलकूद युवा विभाग द्वारा सम्मानित. 1999 में वियना-ऑस्ट्रिया द्वारा नाट्य मंदिर अवार्ड. 1999 में बर्लिन जर्मनी द्वारा इंडियन कल्चर सेंटर अवार्ड. 2001 में सरायकेला पद्मश्री केदार नाथ साहू आर्ट छऊ सेंटर अवार्ड. 2005 में भारत सरकार द्वारा लोक तरंग युवा कला संस्कृति अवार्ड. 2008 में झारखंड सरकार द्वारा कला संस्कृति मंत्रालय अवार्ड. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-the-third-foundation-day-of-sri-sri-108-kangali-baba-was-celebrated-with-pomp/">आदित्यपुर: श्रीश्री 108 कंगाली बाबा का तृतीय स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया
इन देशों में मिला है सम्मान
जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड, डेनमार्क, न्यूजीलैंड, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, श्रीलंका और जापान. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-jan-nayak-karpoori-thakur-was-the-voice-of-the-poor-sharda/">आदित्यपुर: गरीबों की आवाज थे जन नायक कर्पूरी ठाकुर – शारदा [wpse_comments_template]

Leave a Comment