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आदित्यपुर : सितंबर 2022 से कोल्हान के सबसे बड़े ईएसआईसी अस्पताल में दवाइयों का टोटा

Adityapur (Sanjeev Mehta)आदित्यपुर स्थित कोल्हान के सबसे बड़े ईएसआईसी अस्पताल में सितंबर 2022 से ही दवाइयों का टोटा लगा हुआ है. यहां सबसे बड़ी समस्या डायबिटीज और बीपी से ग्रसित मरीजों को हो रही है. उन्हें जरूरी दवाइयां नहीं मिल रही है. शुगर के मरीजों को इंसुलिन और जरूरी दवाइयों के लिए ईएसआईसी के कम्युनिटी सेंटर (राजकीय औषधालय) पर भेजा जा रहा है, जहां से दोबारा दवाइयों को लिखवा कर खुले बाजार से खरीदना पड़ रहा है जिसके पैसे वापस लेने के लिए बीमितों को राजकीय औषधालय के चक्कर लगा कर वर्षों इंतजार करना पड़ रहा है. इसे भी पढ़ें :न्यूजीलैंड">https://lagatar.in/earthquake-tremors-in-new-zealand-magnitude-7-1-on-richter-scale-tsunami-warning/">न्यूजीलैंड

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क्या कहते हैं अस्पताल अधीक्षक 

[caption id="attachment_580874" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/03/esi-asptal-3-300x200.jpg"

alt="" width="300" height="200" /> ईएसआईसी के अधीक्षक डॉ. मिंज.[/caption] इस संबंध में जब ईएसआईसी के अधीक्षक डॉ. मिंज से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनके अस्पताल में बीमितों की संख्या दोगुनी हो गई है जबकि फंड को घटाकर 12 करोड़ सालाना से पांच करोड़ कर दिया गया है. साथ ही ईएसआईसी के मेडिकल बुक से कई जरूरी दवाइयों के नाम को हटा दिया गया है जिसका परचेज हम नहीं कर पा रहे हैं, इससे मरीजों को दवाइयों के लिए परेशान होना पड़ रहा है. इसे भी पढ़ें :शंकराचार्य">https://lagatar.in/shankaracharya-swami-nischalanand-saraswati-reached-ranchi-will-address-dharma-mahasabha-at-harmu-maidan-today/">शंकराचार्य

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पांच वर्ष में दोगुनी हुई है बीमितों की संख्या 

बता दें कि यह अस्पताल कोल्हान का एकमात्र कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा निगम का अस्पताल है. ईएसआईसी अस्पताल में बीमितों की संख्या दिन प्रति बढ़ती जा रही है, पिछले 5 वर्ष में बीमितों की संख्या बढ़कर दोगुनी हो गई है लेकिन केंद्र सरकार से मिलने वाला फंड घट रहा है. 5 साल पूर्व इस अस्पताल में जब बीमितों का संख्या करीब 6 हजार थी तब 12 करोड़ सालाना फंड मिलता था, अब जबकि बीमितों की संख्या 12 हजार के करीब हो गई है तो फंड घटकर 5 करोड़ हो गया है. ईएसआईसी अस्पताल के सूत्र बताते हैं कि अप्रैल से अगस्त तक 4.61 करोड़ रुपये खर्च हो चुका है, जबकि अभी नए फंड मिलने में सात माह बाकी है, आखिर कैसे चलेगा काम. सूत्र यह भी बताते हैं कि फंड की कमी की वजह से बीमितों को दवाइयों के लाले पड़ रहे हैं. उन्हें दवाई तो लिखी जाएगी परंतु उन्हें यह दवा राजकीय औषधालय से लेने पड़ेंगे. अगर वहां भी दवा उपलब्ध नहीं हुए तो बीमितों को खुले बाजार से दवा खरीदकर उन के पैसे के लिए राजकीय औषधालय में रिकयुजिशन डालने पड़ेंगे और बीमितों को तीन से छह महीने तक अपने पैसे वापस लेने के लिए इंतजार करने होंगे. इसे भी पढ़ें :झारखंड">https://lagatar.in/fresh-reward-declared-on-76-maoists-active-in-jharkhand/">झारखंड

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अंशदान देकर भी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हो रहे बीमित 

बता दें कि ईएसआईसी में बीमित कर्मचारियों को अपने वेतन से हर महीने स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अंशदान देने पड़ते हैं लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं के फंड में कटौती की जा रही है जो कहां तक जायज है. इतना ही नहीं ईएसआईसी राज्य प्रबंधन ने वर्ष 2020 से बीमितों को मिलनेवाली सेकेंडरी स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी रोक लगा दी है. सेकेंडरी स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत ईएसआईसी से टाइअप शहर के विभिन्न अस्पतालों में बीमित खुद और अपने आश्रितों का इलाज करवाते थे. वर्तमान में मात्र सुपर हॉस्पिटेलिटी की ही सुविधा बाहर के अस्पतालों में दी जा रही है. इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन के अधीक्षक डॉ. मिंज से पूछे जाने पर वो कहते हैं कि फंड की कमी या वृद्धि में वे कुछ नहीं कर सकते, उनके द्वारा हर वर्ष फंड के लिए लिखा जाता है लेकिन उनके फंड में कटौती हो रही है, इसमें वे कुछ नहीं कर सकते. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-jmm-leader-bajrang-sonkar-died-due-to-heart-attack/">आदित्यपुर

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