- पेटरवार, कसमार और जरीडीह के कई गांवों में जंगली सियारों का बढ़ा खतरा
Ranchi : झारखंड में जंगली हाथियों के हमलों से ग्रामीण पहले ही परेशान हैं. अब बोकारो जिले में जंगली सियारों के हमलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. यहां ग्रामीण इलाकों में लगातार सियारों के हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं. वर्ष 2026 में अब तक सियार के हमले से तीन लोगों की मौत हुई है. वहीं 17 लोग इनके हमले में घायल हुए हैं. केवल नवंबर माह में 4 लोग सियार के हमले से घायल हुए हैं.
लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भय का माहौल है. खासकर सुबह और शाम के समय खेतों, रास्तों और गांव के आसपास निकलना लोगों के लिए जोखिम भरा हो गया है. बोकारो जिले के पेटरवार, कसमार और जरीडीह प्रखंड के कई गांवों में जंगली सियारों के हमले की घटनाएं हुई हैं. इनमें चोड़़ा, हिसिम, दुर्गापुर, खेतको, बेलडीह, चलकरी, चांपी, मायापुर और टांगटोना सहित आसपास के गांव शामिल हैं.
वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील की गई है. वन विभाग ने सियारों के काटने से रेबीज संक्रमण की आशंका को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने का निर्देश दिया है.
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सुबह-शाम अकेले निकलने से बचने की सलाह
वन विभाग ने ग्रामीणों के लिए सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी की है. इसमें सुबह, शाम और रात के समय अकेले बाहर नहीं निकलने, लाठी और टॉर्च साथ रखने तथा बच्चों और बुजुर्गों को अकेला नहीं छोड़ने की सलाह दी गई है. ग्रामीणों से अपने मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर रखने को कहा गया है. किसी भी हिंसक या संदिग्ध सियार के दिखाई देने पर उससे दूरी बनाए रखने और तत्काल पंचायत प्रतिनिधि, पुलिस या वन विभाग को सूचना देने की अपील की गई है.
सियार के काटने पर 15 मिनट तक धोएं घाव
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सियार के काटने की स्थिति में लापरवाही जानलेवा हो सकती है. ऐसी स्थिति में सबसे पहले घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए. इसके बाद तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल पहुंचकर एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) लगवानी चाहिए. गंभीर घाव की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) भी लगवाना जरूरी हो सकता है. इलाज में देरी नहीं करने की सलाह दी गई है.
हमले में मौत या चोट पर मुआवजे का प्रावधान
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सियार के हमले में चोट लगने या मृत्यु होने पर सरकारी मुआवजे का प्रावधान है. इसके लिए संबंधित स्थानीय वन पदाधिकारी या वनरक्षी से संपर्क किया जा सकता है.हाथियों के हमलों के बाद अब सियारों की बढ़ती गतिविधियों ने वन्यजीव और मानव संघर्ष की चुनौती को एक बार फिर सामने ला दिया है.


