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कितने पेपर लीक के बाद इस्तीफा देंगे शिक्षा मंत्री : इमरान प्रतापगढ़ी

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए दिल्ली से कोटा तक "शिक्षा न्याय यात्रा" शुरू की है. उन्होंने कहा कि लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाओं से देशभर के छात्र परेशान हैं, लेकिन सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रही है.
 

Ranchi: कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए दिल्ली से कोटा तक "शिक्षा न्याय यात्रा" शुरू की है. उन्होंने कहा कि लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाओं से देशभर के छात्र परेशान हैं, लेकिन सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रही है.

 

इमरान प्रतापगढ़ी ने रांची के छात्र सार्थक की सराहना करते हुए कहा कि छात्रों ने जिस तरह पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाई है, वह प्रशंसनीय है. उन्होंने कहा कि नीट 2026 पेपर लीक मामले ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है. ऐसी घटनाओं के कारण छात्रों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा और कई छात्र निराशा में गलत कदम उठाने को मजबूर हुए.

 

कांग्रेस सांसद ने कहा कि पार्टी ने ऐसे छात्रों को श्रद्धांजलि अर्पित की है और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है. साथ ही छात्रों की समस्याओं और उनके भविष्य को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही है. कहा कि सवाल यह नहीं है कि पेपर कहां से लीक हुआ, बल्कि यह है कि पेपर लीक कराने वाले लोग कौन हैं और उन्हें संरक्षण कौन दे रहा है.

 

इमरान प्रतापगढ़ी ने बताया कि 9 अगस्त को दिल्ली में छात्रों की मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा. उन्होंने मांग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें और प्रतियोगी परीक्षाओं का एक स्पष्ट और पारदर्शी कैलेंडर जारी किया जाए.

 

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे पेपर लीक और छात्रों की परेशानियों के बावजूद सरकार जवाबदेही तय नहीं कर रही है. उन्होंने पेपर लीक माफिया और शिक्षा मंत्री के बीच कथित संबंधों की जांच की मांग भी की. साथ ही कहा कि यदि प्रश्न पत्रों की सुरक्षा के लिए सेना और वायुसेना की सेवाएं लेनी पड़ रही हैं, तो शिक्षा व्यवस्था पर हो रहे खर्च और उसकी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

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