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प्याज नहीं खाती के बाद अब वित्त मंत्री बोलीं, पेपर लीक से पढ़ने के लिए ज्यादा वक्त मिलता है

देखा जाये तो आंदोलन को सही तरीके से मैनेज करने और सही वक्त पर रेस्पांस देने में केंद्र सरकार विफल रही है. इस पर शुरू से ध्यान दिया गया होता तो यह मामला इतना नहीं बढ़ता. रही-सही कसर टीवी चैनलों, जिसके एंकर को छात्र बिना वर्दी वाला पुलिस मानते हैं, ने तब पूरी कर दी, जब छात्रों के आंदोलन को पाकिस्तान व चीन से कनेक्ट करने की कोशिश की.
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Lagatar Desk :  प्याज की महंगाई के सवाल पर प्याज नहीं खाती का जवाब देने वाली मोदी सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण का ताजा बयान चर्चा है. उन्होंने पेपर लीक से छात्रों को फायदा होने की बात कही है. जिसके बाद से सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा है. कुछ लोग सवाल पूछ रहे हैं कि भाजपा के पीएम व मंत्रियों को हो क्या गया है?

 

वायरल वीडियो न्यूज एजेंसी का है. वीडियो में निर्मला सीतारमण कह रही हैं कि पेपर लीक होने से बहुत सारे छात्रों को फायदा होता है. कई छात्रों ने सामने आकर कहा है कि पेपर लीक की बात पर पहले तो उनके झटका लगा, लेकिन बाद में पढ़ने के लिए ज्यादा वक्त मिला. जिसका लाभ उन्हें मिला.

 

उल्लेखनीय है कि अभी छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी का जो आंदोलन पूरे देश में चल रहा है, उसे संभालने के बजाय भाजपा के मंत्रियों व नेताओं के बयानों ने हालात को और खराब ही किया है. खुद शिक्षा मंत्री छात्रों को दहशतगर्द बोल चुके हैं. और अब निर्मला सीतारमण का बयान सामने आया है. 

 

देखा जाये तो आंदोलन को सही तरीके से मैनेज करने और सही वक्त पर रेस्पांस देने में केंद्र सरकार विफल रही है. इस पर शुरू से ध्यान दिया गया होता तो यह मामला इतना नहीं बढ़ता. रही-सही कसर टीवी चैनलों, जिसके एंकर को छात्र बिना वर्दी वाला पुलिस मानते हैं, ने तब पूरी कर दी, जब छात्रों के आंदोलन को पाकिस्तान व चीन से कनेक्ट करने की कोशिश की. 

 

इसी कड़ी में प्रधानमंत्री का इंस्टाग्राम पर आना भी एक अलग ही चर्चा का विषय बन गया है. ऐसा लगता है सरकार लाइक, डिसलाइक, ट्वीट, रीट्विट व शेयर की संख्या को ही सफलता मानने लगी है.

 

वहीं AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा ने राहुल गांधी के साथ बातचीत फायदेमंद रही. देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर ऐसी बातचीत शायद ही कभी होती है. शिक्षा पर कोई सार्थक चर्चा नहीं होती है. इस बात पर कोई चर्चा नहीं होती कि पूरी शिक्षा व्यवस्था पर इस तरह कब्जा कर लिया गया है और युवा-होनहार दिमागों की शिक्षा, सीखने की क्षमता और जिज्ञासा खत्म हो रही हैय

 

नेहा बोरा ने आगे कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर पीछे नहीं हटा जा सकता है. मंत्रालय बदलने से काम नहीं चलेगा. उन्होंने 20 तारीख को हुई हिंसा के लिए भी जवाबदेही तय होनी चाहिए.  पुलिस कमिश्नर और गृह मंत्री को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.  इस मुद्दे पर कोई समझौता या तालमेल नहीं हो सकता.

 

 

 

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