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NIA की बैठक के बाद पुलिस तैयार कर रही  माओवादियों द्वारा लूटे गए हथियारों का डाटा

Ranchi: नक्सल मामलों को लेकर हाल ही में हुई NIA की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक के बाद झारखंड पुलिस मुख्यालय एक्शन मोड में है. विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, राज्यभर में अब तक माओवादियों और नक्सलियों द्वारा पुलिस जवानों से लूटे गए हथियारों का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है. इसके साथ ही बरामद हथियारों का जिला स्तर पर सत्यापन भी शुरू कर दिया गया है.

 

सूत्रों की मानें तो पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. इसमें यह जानकारी जुटाई जा रही है कि अब तक कितने हथियार नक्सल घटनाओं में लूटे गए, उनमें से कितने बरामद हुए और फिलहाल वे किस थाना क्षेत्र के मालखाना या पुलिस आर्मरी में सुरक्षित रखे गए हैं.

 

जिला वार मांगा गया पूरा ब्योरा


मुख्यालय की ओर से सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि बरामद हथियारों का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट भेजी जाए. खास तौर पर यह देखा जा रहा है कि जिन हथियारों की बरामदगी दिखायी गई है, वे वास्तव में संबंधित थाना के मालखाना में मौजूद हैं या नहीं. सूत्र बताते हैं कि कई मामलों में दूसरे राज्यों में भी झारखंड पुलिस से लूटे गए हथियार बरामद हुए हैं. ऐसे हथियारों की भी क्रॉस वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू की गई है. संबंधित एजेंसियों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कौन-सा हथियार किस राज्य की पुलिस या किस घटना से जुड़ा है.

 

फिर से पुलिस इस्तेमाल कर सकेगी हथियार


जानकारी के मुताबिक, सत्यापन पूरा होने के बाद जिन हथियारों की कानूनी प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी, उन्हें संबंधित राज्य पुलिस को वापस सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है. उद्देश्य यह है कि बरामद हथियार दोबारा सुरक्षा बलों के इस्तेमाल में लाए जा सकें, बजाय इसके कि वे वर्षों तक मालखाना में पड़े रहें.

 

अगली बैठक में पेश होगी पूरी रिपोर्ट

 

सूत्रों के अनुसार, पुलिस मुख्यालय अगले उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पूरा डाटा और सत्यापन रिपोर्ट पेश करेगा. इसमें जिला वार लूटे गए हथियार, बरामदगी की स्थिति, वर्तमान लोकेशन और इंटर-स्टेट रिकवरी से जुड़ी जानकारी शामिल रहेगी.

 

माना जा रहा है कि यह पहली बार है, जब झारखंड में नक्सलियों द्वारा वर्षों में लूटे गए हथियारों का इतना विस्तृत और केंद्रीकृत डाटा तैयार किया जा रहा है. इससे न केवल सुरक्षा एजेंसियों को रणनीति बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि पुराने नक्सली मामलों की जांच को भी नई दिशा मिल सकती है.

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