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उत्पाद सिपाही नियुक्ति प्रक्रिया टेंडर रद्द होने वाली एजेंसी को HC से नहीं मिली अंतरिम राहत

उत्पाद सिपाही नियुक्ति प्रक्रिया के वर्क आर्डर को झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (जेएसएससी) द्वारा रद्द किए जाने को चुनौती देने वाली इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोमेट्री की याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने प्रार्थी को वर्क ऑर्डर रद्द किए जाने मामले में कोई अंतरिम राहत नहीं दी.
 

Ranchi: उत्पाद सिपाही नियुक्ति प्रक्रिया के वर्क आर्डर को झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (जेएसएससी) द्वारा रद्द किए जाने को चुनौती देने वाली इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोमेट्री की याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने प्रार्थी को वर्क ऑर्डर रद्द किए जाने मामले में कोई अंतरिम राहत नहीं दी. 

 

प्रार्थी को मामले को संशोधित पिटीशन दाखिल करने के लिए समय दिया. वही जेएसएससी को मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया. प्रार्थी ने उक्त नियुक्ति प्रक्रिया के वर्क आर्डर को 13 अक्टूबर 2025 को जेएसएससी द्वारा रद्द किए जाने को गलत बताया है.

 

साथ ही बैंक गारंटी एनकैशमेंट को रोकने का आग्रह किया है. जेएसएससी के अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने कोर्ट को बताया कि एजेंसी ने समय पर काम नहीं पूरा किया जिससे उत्पाद सिपाही नियुक्ति प्रक्रिया में विलंब हुआ.  

 

अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने कोर्ट को बताया कि सर्विस एग्रीमेंट के हिसाब से काम नहीं करने पर जेएसएससी ने एजेंसी का वर्क आर्डर 13 अक्टूबर 2025 को रद्द कर दिया था. एजेंसी ने इसके खिलाफ जेएसएससी के समक्ष रिव्यू पिटीशन दिया, जिसे अनुचित ठहराते हुए जेएसएससी ने वर्क आर्डर रद्द किए जाने के अपने निर्णय को सही ठहराया.

 

प्रार्थी ने केवल उनके टेंडर रद्द किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, रिव्यू पिटीशन को जेएसएससी द्वारा एंटरटेन नहीं किए जाने को उसने चुनौती नहीं दी है. इसलिए उनकी याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया कि एजेंसी को मई - जून 2025 में उत्पाद सिपाही नियुक्ति प्रक्रिया के मटेरियल उपलब्ध कराना था ताकि उत्पाद सिपाही नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो सके.

 

वर्क आर्डर के तहत एजेंसी को तीन माह में एग्जाम से संबंधित मटेरियल जेएसएससी को उपलब्ध कराने का कार्य पूरा कर लेना था. लेकिन एजेंसी ने नहीं किया. इसके बाद जेएसएससी ने उसके वर्क आर्डर को रद्द करने के साथ-साथ उसके बैंक गारंटी एनकैशमेंट के लिए बैंक को भी कह दिया. वर्क ऑर्डर रद्द करने के पहले एजेंसी को शो कॉज नोटिस भी दिया गया था. एजेंसी ने वर्क ऑर्डर रद्द किए जाने के खिलाफ जेएसएससी के पास अभ्यावेदन भी दिया था जिसे जेएसएससी ने नकार दिया था.

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